नई दिल्ली: NEET पेपर लीक विवाद और उससे जुड़े छात्र आंदोलन के बीच Cockroach Janata Party (CJP) ने केंद्र सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई है। हालांकि, तीन दौर की बातचीत के बाद भी सरकार ने इस मांग को स्वीकार करने के कोई संकेत नहीं दिए हैं।
तो सवाल उठता है—आखिर सरकार धर्मेंद्र प्रधान को हटाने के लिए तैयार क्यों नहीं दिख रही है?
नीचे उन प्रमुख कारणों का विश्लेषण है जो अब तक सामने आई आधिकारिक और राजनीतिक जानकारी पर आधारित हैं।
1. सरकार का मानना है कि व्यक्तिगत जिम्मेदारी साबित नहीं हुई
सरकारी सूत्रों के अनुसार केंद्र का तर्क है कि NEET पेपर लीक जैसी घटनाओं के लिए सीधे शिक्षा मंत्री को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। सरकार का कहना है कि जांच एजेंसियां, NTA और संबंधित प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की जा रही है, लेकिन मंत्री को हटाने का आधार फिलहाल पर्याप्त नहीं माना जा रहा।
2. इस्तीफा देने से राजनीतिक मिसाल बनने का डर
विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार आंदोलन के दबाव में किसी केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा स्वीकार करती है, तो भविष्य में अन्य आंदोलनों में भी इसी तरह की मांगें उठ सकती हैं।
ऐसी स्थिति सरकार के लिए राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे यह संदेश जा सकता है कि सड़क पर विरोध के दबाव में कैबिनेट फैसले बदले जा सकते हैं।
3. बातचीत जारी रखना, लेकिन ‘रेड लाइन’ नहीं पार करना
अब तक हुई बैठकों में सरकार ने CJP की कई बातों को सुना है और परीक्षा सुधारों पर सुझाव भी स्वीकार करने की बात कही है। हालांकि, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सरकार की “रेड लाइन” बना हुआ है।
यही वजह है कि वार्ता जारी है, लेकिन सबसे बड़ी मांग पर सहमति नहीं बन पा रही।
4. सरकार सुधारों पर फोकस दिखाना चाहती है
हाल के दिनों में NTA में प्रशासनिक बदलाव, अधिकारियों पर कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं।
सरकार का संदेश यह है कि जवाबदेही संस्थागत सुधारों से तय होगी, न कि केवल मंत्री बदलने से।
5. संसद और राजनीतिक संदेश
संसद का मानसून सत्र चल रहा है और विपक्ष लगातार इस मुद्दे को उठा रहा है।
यदि सरकार इस समय मंत्री को हटाती है, तो विपक्ष इसे अपनी राजनीतिक जीत के रूप में पेश कर सकता है। ऐसे में सरकार फिलहाल रक्षात्मक रुख अपनाने के बजाय अपने निर्णय पर कायम दिखाई दे रही है।
6. CJP की मांग अब भी ‘गैर-परक्राम्य’
दूसरी ओर CJP लगातार कह रहा है कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उसकी मुख्य और गैर-परक्राम्य (non-negotiable) मांग है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि इस पर फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
सरकार और CJP के बीच वार्ता जारी है, लेकिन सबसे बड़ा गतिरोध शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर बना हुआ है। अभी तक किसी आधिकारिक घोषणा में सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान को हटाने का संकेत नहीं दिया है।
यदि आने वाले दौर की बातचीत में भी यही स्थिति बनी रहती है, तो आंदोलन और राजनीतिक टकराव दोनों तेज हो सकते हैं। वहीं, यदि सरकार कोई वैकल्पिक समाधान या व्यापक शिक्षा सुधार पैकेज पेश करती है, तो वार्ता आगे बढ़ने की संभावना बन सकती है।
फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर यह कहा जा सकता है कि केंद्र सरकार की रणनीति दो हिस्सों में बंटी हुई दिखती है—
- संवाद जारी रखना।
- लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर फिलहाल झुकने से बचना।
यही कारण है कि CJP के 24 घंटे के अल्टीमेटम के बावजूद सरकार अपने रुख पर कायम दिखाई दे रही है। हालांकि अंतिम निर्णय सरकार की आधिकारिक घोषणा और आगे की वार्ताओं पर निर्भर करेगा।
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