पश्चिम एशिया में जंग से महाराष्ट्र के किसानों पर संकट, हजारों कंटेनर बंदरगाह पर फंसे

केले, अंगूर, प्याज से भरे सैकड़ों कंटेनर जेएनपीए में खड़े, शिपिंग कंपनियों ने रोकी खाड़ी देशों के लिए सेवा, कीमतों में भारी गिरावट

मुंबई: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब सीधे महाराष्ट्र के किसानों और निर्यातकों की जेब पर पड़ रहा है। मुंबई के पास स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) पर केले, अंगूर, प्याज और तरबूज से भरे हजारों कंटेनर फंसे हुए हैं। शिपिंग कंपनियों ने खाड़ी देशों के लिए अपनी सेवाएं रोक दी हैं, जिससे करीब 2,000 कंटेनर बंदरगाह पर ही खड़े हैं ।

बंदरगाह पर बढ़ी मुश्किलें

जेएनपीए पर निर्यात के लिए तैयार ये कंटेनर पिछले कई दिनों से खड़े हैं। नाशिक के पिंपळगाव और लासलगांव बाजारों से आए करीब 200 कंटेनर सिर्फ प्याज के ही हैं । हर कंटेनर में करीब 29-30 टन प्याज है, यानी करीब साढ़े चार हजार टन प्याज बंदरगाह पर फंसा हुआ है । इसके अलावा केले और अंगूर के भी सैकड़ों कंटेनर खाड़ी देशों के रवाना होने का इंतजार कर रहे हैं ।

क्यों रुका निर्यात?

ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरना खतरनाक हो गया है। शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों को सुरक्षित रास्तों से भेजना शुरू कर दिया है, जिससे 25 दिन की यात्रा अब 45 दिन तक पहुंच गई है । कई कंपनियों ने तो खाड़ी देशों के लिए बुकिंग ही रोक दी है । जो जहाज जा भी रहे हैं, उन पर शिपिंग कंपनियों ने 2,000 से 4,000 डॉलर प्रति कंटेनर ‘इमरजेंसी कनफ्लिक्ट सरचार्ज’ लगा दिया है ।

कीमतों पर क्या असर पड़ा?

निर्यात रुकने का सबसे बुरा असर कीमतों पर पड़ा है। केले के भाव 25 रुपये प्रति किलो से गिरकर 15 रुपये प्रति किलो पर आ गए हैं । एक्सपोर्टर राहुल पवार ने बताया, “आयात-निर्यात पर 60 फीसदी तक का असर पड़ा है” । बारामती के केला उत्पादक कपिल जयप्रकाश जाधव ने बताया, “केले 24,000 रुपये प्रति टन से गिरकर 15,000 रुपये पर आ गए। मेरी उत्पादन लागत 135 रुपये प्रति पौधा थी, जो अब निकलना मुश्किल है” ।

किसानों की मजबूरी

निर्यात रुकने से किसानों के सामने दो ही रास्ते हैं – या तो अपनी फसल सड़ने दें या फिर घरेलू बाजार में घाटे में बेच दें। अहमदनगर के प्याज किसान बबन नानाभाऊ फांड पाटिल ने बताया, “किसान निराशा में डूब रहे हैं। महाराष्ट्र का 22 फीसदी प्याज दुबई जाता है। अब वह रास्ता बंद हो गया” ।

पुणे जिले के एक और किसान गुलाब नेहरकर ने बताया, “आमतौर पर पुणे जिले से 250 कंटेनर निर्यात होते हैं, अब मुश्किल से 50 ही जा पाए हैं। 500 से ज्यादा कंटेनर पूरे राज्य के बंदरगाहों पर फंसे हैं” ।

रमजान में बढ़ी टेंशन

यह संकट ऐसे समय आया है जब रमजान के दौरान खाड़ी देशों में फल-सब्जियों की सबसे ज्यादा मांग रहती है। 80 फीसदी निर्यात इसी सीजन में होता है । लेकिन अब यह मांग पूरी नहीं हो पा रही। निर्यातक संजय पंसारे ने कहा, “रमजान में तरबूज, अंगूर और केले की भारी मांग होती है। अब 100 फीसदी हवाई और समुद्री रास्ते प्रभावित हैं” ।

हर दिन बढ़ रहा नुकसान

जेएनपीए पर फंसे हर कंटेनर पर करीब 8,500 रुपये रोज का अतिरिक्त खर्च आ रहा है । अगले कुछ दिनों में अगर निर्यात शुरू नहीं हुआ, तो यह माल सड़ जाएगा और करोड़ों का नुकसान होगा । केरवा के किसान कपिल जाधव ने बताया, “मैं अगले दो महीने में 18-20 लाख रुपये की कमाई की उम्मीद कर रहा था। अब 80 फीसदी नुकसान पक्का है” ।

सरकार से गुहार

किसानों और निर्यातकों ने केंद्र और राज्य सरकारों से तुरंत मदद की गुहार लगाई है। महाराष्ट्र स्टेट ऑनियन प्रोड्यूसर फार्मर्स ऑर्गेनाइजेशन के अध्यक्ष भारत दिघोले ने 1,500 रुपये प्रति क्विंटल सब्सिडी, पोर्ट चार्जेज में छूट और सरकारी खरीद शुरू करने की मांग की है । फेडरेशन ऑफ एसोसिएशन्स ऑफ महाराष्ट्र के अध्यक्ष जितेंद्र शाह ने कहा, “हम शिपिंग, वाणिज्य और विदेश मंत्रालयों को पत्र लिख रहे हैं ताकि नुकसान कम किया जा सके” ।