अमेरिका ने भारत पर लगाया 10% अतिरिक्त टैरिफ, लेकिन दवा और स्मार्टफोन को राहत; जानिए किन सेक्टरों पर सबसे बड़ा असर होगा

US Tariff on Indian Imports

US Tariff on Indian Imports एक बार फिर वैश्विक व्यापार की सबसे बड़ी चर्चा बन गया है। अमेरिकी प्रशासन ने भारत समेत लगभग 60 व्यापारिक साझेदार देशों से आने वाले कई उत्पादों पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने की घोषणा की है।

भारत के लिए राहत की बात यह है कि प्रस्तावित 12.5% अतिरिक्त शुल्क की तुलना में अंतिम निर्णय में इसे 10% तक सीमित रखा गया है। दूसरी ओर, यह भी सच है कि भारत के लगभग 55% निर्यात अब इस अतिरिक्त शुल्क के दायरे में आएंगे।

हालांकि अच्छी खबर यह है कि भारत के सबसे मजबूत निर्यात क्षेत्रों—जैसे Generic Pharmaceuticals, Smartphones, Steel, Aluminium और Auto Parts—को इस अतिरिक्त शुल्क से छूट दी गई है।

इस फैसले का असर केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसका प्रभाव भारतीय उद्योग, रोजगार, निर्यात, निवेश और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर भी देखने को मिल सकता है।

Breaking Update

अमेरिकी प्रशासन ने नए व्यापारिक उपायों के तहत भारत सहित 60 देशों पर अतिरिक्त आयात शुल्क लागू किया है।

भारत पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया है जबकि कुछ अन्य देशों पर 12.5% तक शुल्क लगाया गया है।

सरकारी जानकारी के अनुसार—

  • लगभग 55% भारतीय निर्यात प्रभावित होंगे।
  • लगभग 45% निर्यात अतिरिक्त शुल्क से बाहर रहेंगे।
  • Generic Medicines को राहत।
  • Smartphones को राहत।
  • Steel एवं Aluminium को छूट।
  • Auto Parts पर नया शुल्क लागू नहीं होगा।

भारत सरकार ने कहा है कि अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर बातचीत जारी रहेगी।

आखिर अमेरिका ने यह फैसला क्यों लिया?

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक पारदर्शी बनाने तथा कथित तौर पर Forced Labour से जुड़े आयात को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

इसके अलावा अमेरिका अपनी घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करना चाहता है।

पिछले कुछ वर्षों से अमेरिका लगातार आयात पर शुल्क बढ़ाकर घरेलू उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देने की नीति पर काम कर रहा है।

भारत भी इस नीति से अछूता नहीं रहा।

हालांकि भारत को अपेक्षाकृत कम यानी 10% अतिरिक्त शुल्क वाले समूह में रखा गया है।

किन भारतीय उत्पादों पर असर पड़ेगा?

यह सबसे बड़ा सवाल है।

भारत का अमेरिका को निर्यात काफी विविध है।

इनमें टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग उत्पाद, मशीनरी, रसायन, प्लास्टिक, जेम्स एंड ज्वेलरी और कई प्रकार के उपभोक्ता सामान शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अतिरिक्त शुल्क से इन उत्पादों की अमेरिकी बाजार में कीमत बढ़ सकती है।

यदि कीमत बढ़ती है तो अमेरिकी खरीदार दूसरे देशों की ओर रुख कर सकते हैं।

इससे भारतीय निर्यातकों के ऑर्डर प्रभावित हो सकते हैं।

किन उत्पादों को राहत मिली?

यह भारत के लिए सबसे सकारात्मक पक्ष माना जा रहा है।

निम्न प्रमुख उत्पाद अतिरिक्त 10% शुल्क से मुक्त रखे गए हैं—

  • Generic Pharmaceuticals
  • Smartphones
  • Steel
  • Aluminium
  • Auto Parts
  • कुछ अन्य रणनीतिक उत्पाद

भारत के कुल निर्यात में इन क्षेत्रों की हिस्सेदारी काफी महत्वपूर्ण है।

यही कारण है कि विशेषज्ञ इसे भारत के लिए आंशिक राहत मान रहे हैं।

दवा उद्योग को क्यों मिली राहत?

भारत दुनिया का सबसे बड़ा Generic Medicines Exporter माना जाता है।

अमेरिका भारत की दवा कंपनियों का सबसे बड़ा बाजार है।

यदि दवाओं पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता तो—

  • अमेरिकी मरीजों के लिए दवाएं महंगी हो जातीं।
  • अमेरिकी स्वास्थ्य व्यवस्था की लागत बढ़ जाती।
  • भारत की दवा कंपनियों को बड़ा नुकसान होता।

इसी कारण Generic Medicines को अतिरिक्त शुल्क से बाहर रखा गया।

स्मार्टफोन उद्योग को क्या फायदा?

पिछले कुछ वर्षों में भारत वैश्विक स्मार्टफोन निर्माण का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है।

Apple सहित कई वैश्विक कंपनियां भारत में उत्पादन बढ़ा रही हैं।

यदि Smartphones पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता तो भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात को बड़ा झटका लग सकता था।

लेकिन छूट मिलने से भारत की Electronics Manufacturing Strategy को राहत मिली है।

सबसे अधिक असर किन उद्योगों पर?

विशेषज्ञों के अनुसार सबसे अधिक प्रभाव इन क्षेत्रों पर पड़ सकता है—

Textile Industry

भारत का टेक्सटाइल उद्योग अमेरिका को बड़े पैमाने पर निर्यात करता है।

अतिरिक्त शुल्क से प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।

Leather Industry

भारत के चमड़ा उत्पादों की अमेरिकी बाजार में अच्छी मांग है।

अतिरिक्त शुल्क से कीमत बढ़ सकती है।

Engineering Goods

भारत के इंजीनियरिंग उत्पाद निर्यात का बड़ा हिस्सा अमेरिका जाता है।

इनकी प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो सकती है।

Gems & Jewellery

यह सेक्टर पहले से वैश्विक मांग में कमजोरी झेल रहा है।

नया शुल्क अतिरिक्त दबाव पैदा कर सकता है।

Chemicals

रासायनिक उत्पादों की लागत बढ़ने से निर्यात प्रभावित हो सकता है।

भारत के लिए राहत क्यों मानी जा रही है?

पहले प्रस्तावित 12.5% शुल्क की तुलना में अंतिम निर्णय 10% रहा।

यानी भारत को अपेक्षाकृत कम अतिरिक्त शुल्क मिला।

इसके अलावा जिन उत्पादों को छूट मिली है, वे भारत के सबसे बड़े निर्यात क्षेत्रों में शामिल हैं।

इससे भारतीय निर्यात पर संभावित नुकसान सीमित रहने की उम्मीद जताई जा रही है।

क्या भारत जवाबी कार्रवाई करेगा?

फिलहाल भारत सरकार ने किसी जवाबी शुल्क की घोषणा नहीं की है।

सरकार का जोर व्यापार वार्ता पर है।

भारत और अमेरिका के बीच Bilateral Trade Agreement पर बातचीत जारी है।

यदि यह समझौता सफल होता है तो भविष्य में कई उत्पादों पर शुल्क कम हो सकता है।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?

अल्पकाल में—

  • कुछ निर्यात क्षेत्रों पर दबाव बढ़ सकता है।
  • छोटे निर्यातकों की लागत बढ़ सकती है।
  • अमेरिकी ऑर्डर प्रभावित हो सकते हैं।

दीर्घकाल में—

  • भारत नए बाजार तलाश सकता है।
  • यूरोप, अफ्रीका और मध्य पूर्व में निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है।
  • घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को और प्रतिस्पर्धी बनाने की कोशिश होगी।

क्या निवेशकों को चिंता करनी चाहिए?

विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है।

क्योंकि—

  • प्रमुख निर्यात क्षेत्र सुरक्षित हैं।
  • दवा उद्योग प्रभावित नहीं हुआ।
  • स्मार्टफोन निर्यात को राहत मिली।
  • व्यापार वार्ता जारी है।

हालांकि जिन कंपनियों का कारोबार मुख्य रूप से टेक्सटाइल, लेदर और इंजीनियरिंग निर्यात पर निर्भर है, उनकी स्थिति पर निवेशकों की नजर रहेगी।

भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों का भविष्य

भारत और अमेरिका दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाएं हैं।

दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है।

हाल के वर्षों में रक्षा, ऊर्जा, तकनीक, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल सेवाओं में सहयोग मजबूत हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह अतिरिक्त शुल्क दोनों देशों के संबंधों का अंत नहीं बल्कि चल रही व्यापारिक बातचीत का एक चरण है।

यदि प्रस्तावित Bilateral Trade Agreement सफल होता है, तो भविष्य में कई व्यापारिक बाधाएं कम हो सकती हैं।

अमेरिका द्वारा भारत पर लगाया गया 10% अतिरिक्त टैरिफ पहली नजर में चिंता का विषय जरूर है, लेकिन पूरी तस्वीर इससे कहीं अधिक संतुलित दिखाई देती है। भारत को प्रारंभिक प्रस्ताव की तुलना में कम शुल्क मिला है और दवा, स्मार्टफोन, स्टील, एल्युमिनियम तथा ऑटो पार्ट्स जैसे रणनीतिक निर्यात क्षेत्रों को छूट भी प्राप्त हुई है।

फिर भी टेक्सटाइल, लेदर, इंजीनियरिंग, केमिकल्स और अन्य श्रम-प्रधान उद्योगों के लिए यह निर्णय चुनौतीपूर्ण हो सकता है। आने वाले महीनों में भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की प्रगति यह तय करेगी कि यह अतिरिक्त शुल्क अस्थायी दबाव बनकर रह जाता है या दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में दीर्घकालिक बदलाव का कारण बनता है।

और ताज़ा खबरों के लिए ‘Read more‘ पर क्लिक करें