Islamabad वार्ता की तैयारियाँ और नए संकेत
इस समय US-Iran Tensions Escalate दुनियाभर में चर्चा का विषय हैं। हाल ही में US President Donald Trump ने घोषणा की कि अमेरिकी वार्ताकार सोमवार को Islamabad में Iran के साथ नई बातचीत करेंगे। यह वार्ता पहले के जारी 10-दिवसीय युद्धविराम (ceasefire) को बढ़ाने की कोशिश है, जो बुधवार को ख़त्म होने वाला है। White House की प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि US दल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति JD Vance करेंगे, जिन्होंने पिछले दौर की वार्ता में भी हिस्सा लिया था। Islamabad में सुरक्षा कड़ी की गई है और पाकिस्तान सरकार दोनों पक्षों की मेज़बानी के लिए तैयार है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री ईशाक दर ने कहा था कि उनका देश “दोनों पक्षों के बीच सार्थक वार्ता की मेज़बानी करेगा” और दोनों ही पक्षों ने इस पर भरोसा जताया है।
पिछले सप्ताह Pakistan में हुई पहली सीधी बैठकों का कोई नतीजा नहीं निकला था, लेकिन दोनों ओर से बातचीत जारी रखने की इच्छा दिखाई गई। Iran के प्रवक्ता Saeed Khatibzadeh ने कहा कि द्विपक्षीय ‘फ्रेमवर्क’ पर सहमति के बिना अगली तारीख तय नहीं की जा सकती। Iran की संसद के अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने भी माना कि ‘अभी कई अंतर और बुनियादी बिंदु बाकी हैं’। बावजूद इसके, पाकिस्तान वार्ता को आगे बढ़ाने में मध्यस्थ भूमिका निभाने के लिए प्रयास कर रहा है।
Trump की कड़ी चेतावनी: पावर प्लांट और ब्रिज निशाना
वार्ता की तैयारी के साथ ही President Trump ने Iran को बेतुकी चेतावनी दी है। उन्होंने Truth Social पर लिखा है कि अमेरिका एक “बहुत ही उचित और वाजिब समझौता” पेश कर रहा है, और यदि Iran इसे स्वीकार नहीं करता है तो “the United States is going to knock out every single Power Plant, and every single Bridge, in Iran”। अर्थात्, यदि Iran डील स्वीकार नहीं करता, तो अमेरिका वहाँ की हर विद्युत परियोजना और पुल को नष्ट कर देगा। यह संदेश पूरे विश्व के लिए हैरान करने वाला है।
Trump ने इन धमकियों को जारी रखते हुए कहा है कि Iran लगातार झूठी खबरें फैला रहा है और US की ‘महान और शानदार योजना’ को मानने को तैयार होना चाहिए। उन्होंने Iranian Air Force की एक मिसाइल तैनाती की बात कहते हुए यह भी ऐलान किया कि US Navy खाड़ी में खतरनाक खानों को निष्क्रिय करने लगेगा। अमेरिका का कहना है कि उसने खाड़ी में चल रहे बंदोबस्त को 100% पूरा करने तक विस्तारित रखेगा।
इस धमकी के बाद विश्व समुदाय में गहरी चिंता है। कई देशों ने संकट टालने और वार्ता बढ़ाने की अपील की है। साथ ही, जानकार मानते हैं कि Trump की भाषा न केवल कड़ी है बल्कि इससे युद्ध के नियमों का उल्लंघन हो सकता है। Iran ने भी इसे युद्ध अपराध कहते हुए पहले ही चेतावनी दी है कि अमेरिका को शर्मिंदा किया जाएगा।
Hormuz जलमार्ग पर IRGC की सख्ती
Trump की चेतावनी और US के नये हमलों की तैयारियों के बीच, Iran ने Hormuz के रास्ते पर कड़ा कदम उठाया है। Iran की Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) Navy ने शनिवार को घोषणा की कि Strait of Hormuz को फिर से बंद किया गया है और जब तक US अपनी नाकेबंदी नहीं हटाता, यह बंद रहेगा। IRGC ने कहा है कि हॉरमज़ जलमार्ग पर जाने वाले किसी भी जहाज को दुश्मन समझकर निशाना बनाया जाएगा। Tasnim न्यूज एजेंसी के अनुसार, Iran की उच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने US की नाकेबंदी को संघर्ष-विराम का उल्लंघन करार दिया है।
Hormuz को बंद करने के लिए IRGC की नौकाएँ और गनबोट सक्रिय हो गई हैं। UKMTO (यूनाइटेड किंगडम मरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस) को सूचना मिली कि Hormuz के पास कम से कम तीन जहाज़ों पर IRGC की ओर से गोलीबारी हुई, जिनमें एक भारतीय ध्वज वाला टैंकर भी शामिल था। समाचार एजेंसियों के अनुसार एक कंटेनर जहाज भी अज्ञात प्रक्षेप्य लगने से क्षतिग्रस्त हुआ। भारत सरकार ने दो भारतीय जहाज़ों पर हमले पर गहरा ऐतराज़ जताया है और Tehran में भारतीय राजदूत को तलब किया है।
इस बीच US Central Command ने कहा है कि उसने Hormuz के पास से 23 जहाजों को वापस लौटने को मजबूर किया है since बैक अभियान की शुरुआत। अमेरिका का दावा है कि वह गैर-इरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले जहाजों पर रोक नहीं लगा रहा, लेकिन हर टैंकर को पूर्व सूचना देने के बाद ही आगे बढ़ने की आज्ञा दे रहा है। स्थानीय विशेषज्ञ बताते हैं कि Hormuz की नवीनतम बंदी से वैश्विक तेल बाजार में नया उथल-पुथल हो सकता है। दुनिया के लगभग 20% तेल का कारोबार Hormuz से होता है, और इसका बंद होना कच्चे तेल की कीमतें बढ़ा सकता है।
सीमा रेखा के पार: वैश्विक प्रभाव और शांति की संभावना
US-Iran Tensions Escalate का सीधा असर न केवल मध्य-पूर्व पर, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। Hormuz के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संकट और गहरा सकता है। संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ समेत कई देशों ने Hormuz मार्ग को खुला रखने की अपील की है, लेकिन Iran का कहना है कि वह अपनी रक्षा कर रहा है और कोई “रक्षा नहीं करता भागता है।” Esmaeil Baghaei ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय कानून केवल पारगमन की स्वतंत्रता पर जोर देता है, लेकिन अमेरिका-इस्राइल के हमलों के बाद Iran को अपना कर्तव्य निभाना पड़ा।
भारत और अन्य तेल-आयातक देश Hormuz तनाव से चिंतित हैं। दोनों देशों ने इस बीच अपने जहाज़ों की सुरक्षा बढ़ा दी है। व्यापार जगत में भी तैयारी तेज है: कंपनियाँ वैकल्पिक मार्ग तलाश रही हैं, और कच्चे तेल की ढुलाई की लागत बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर यह तनाव बढ़ा तो दुनियाभर में तेल व गैस की किल्लत हो सकती है, जिससे महंगाई और आर्थिक चुनौतियाँ खड़ी हो सकती हैं। वहीं, अगर Islamabad वार्ता में कुछ हल निकल आया तो बाजार को उम्मीद की किरण मिल सकती है।
संभावित समाधान की बात करें तो दोनों पक्ष एक समझौते की दिशा में बातचीत कर रहे हैं। Iran का प्रमुख मुद्दा अपने परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय अनुबंध रखे हुए हैं, जबकि US आरोप लगा रहा है कि Iran ‘अत्यधिक मांगें’ रखता है। ऐसा लगता है कि Islamabad वार्ता से पहले ही पेंच कई जमींदारी बिंदुओं पर अटका हुआ है। फिर भी, Pakistan और वैश्विक मध्यस्थ आश्वस्त हैं कि बातचीत का सिलसिला जारी रखना चाहिए। पाकिस्तान की कोशिश है कि दोनों नेताओं में विश्वास बनाए रखा जाए, ताकि शांति की बहाली और युद्ध विराम का विस्तार हो सके।
संवाद ही समाधान की कुंजी
अभी के परिदृश्य में US-Iran Tensions Escalate की स्थिति बेहद नाजुक है। अमेरिकी वार्ता दल Islamabad में पाकिस्तान की मीडिएशन में बैठकों की तैयारी कर रहा है, ताकि संघर्ष विराम लंबा खिंच सके और द्विपक्षीय समझौता हो सके। साथ ही Donald Trump ने Iran को चेतावनी दी है कि अगर वे US की प्रस्तावित डील स्वीकार नहीं करते, तो वह Iran की बुनियादी अवसंरचना को निशाना बनाकर भारी खतरा उठा सकता है। वहीं Iran की Revolutionary Guards ने Hormuz जलमार्ग को तब तक बंद रहने की घोषणा करके यह संदेश दिया है कि वह अमेरिकी नाकेबंदी को सीधे चुनौती दे रहा है।
प्रारंभिक विश्लेषण से स्पष्ट है कि इस तनाव के हल के लिए कूटनीतिक वार्ता ही एकमात्र प्रभावी मार्ग है। वैसे तो दोनों ओर से कड़वी बयानबाजी हो रही है, लेकिन शांति की आशा बनी हुई है क्योंकि युद्ध से किसी को लाभ नहीं है। Islamabad वार्ता और Hormuz पर नियंत्रण, यह सभी संकेत दे रहे हैं कि अगली कुछ दिनों में ही भविष्य का रास्ता साफ होगा।
आज का संदेश यह है कि संवाद ही इस संकट का विकल्प है। अगर दोनों पक्ष संयम और समझ से बातचीत करेंगे, तो वैश्विक और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आशा की एक नई किरण पैदा हो सकती है। नहीं तो, यह संकट और गहरा सकता है और बड़ा युद्ध छिड़ सकता है।
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