Sonam Wangchuk Hunger Strike Day 18:दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, CJP ने देशव्यापी एक-दिवसीय उपवास का ऐलान

Sonam Wangchuk Hunger Strike

Sonam Wangchuk Hunger Strike लगातार राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना हुआ है। शिक्षा सुधार और कथित परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन अब न्यायपालिका तक पहुंच चुका है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक पिछले 18 दिनों से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनके स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती चिंता के बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है।

इसी बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 16 जुलाई को देशव्यापी एक-दिवसीय सामूहिक भूख हड़ताल का आह्वान किया है। पार्टी का कहना है कि यह कार्यक्रम वांगचुक के समर्थन और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग के लिए आयोजित किया जा रहा है। हालांकि, CJP की मांगें और आरोप उसके अपने बयान हैं, जिन पर सरकार की ओर से समान रूप से स्वीकारोक्ति नहीं की गई है।

आखिर क्यों चर्चा में है Sonam Wangchuk Hunger Strike?

सोनम वांगचुक ने 28 जून से अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया। आंदोलन का मुख्य उद्देश्य कथित परीक्षा अनियमितताओं, विशेष रूप से NEET पेपर लीक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों पर जवाबदेही तय करने की मांग बताई जा रही है।

प्रदर्शन में शामिल संगठनों का कहना है कि लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। वहीं सरकार पहले भी परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कह चुकी है।

स्वास्थ्य लगातार बिगड़ने की रिपोर्ट

वांगचुक के समर्थकों और अदालत में दायर याचिका के अनुसार, लंबे उपवास के कारण उनका स्वास्थ्य तेजी से प्रभावित हुआ है।

याचिका में दावा किया गया है कि—

  • लगभग 8.5 किलोग्राम वजन कम हुआ।
  • रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) का स्तर गिरा।
  • शरीर में कमजोरी लगातार बढ़ रही है।
  • चिकित्सकीय हस्तक्षेप की आवश्यकता बताई गई है।

इन दावों के आधार पर अदालत में तत्काल चिकित्सा सहायता की मांग की गई।

दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या कहा?

दिल्ली हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका (PIL) में मांग की गई कि वांगचुक को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराया जाए।

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने मामले को अत्यावश्यक मानते हुए शीघ्र सुनवाई का निर्णय लिया।

यह ध्यान देने योग्य है कि अदालत ने अभी कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है। फिलहाल सरकारों से जवाब तलब किया गया है।

फोर्स-फीडिंग की मांग क्यों उठी?

याचिका में यह भी अनुरोध किया गया कि यदि आवश्यक हो तो वांगचुक को जीवनरक्षक पोषण (Force Feeding/Medical Feeding) उपलब्ध कराया जाए ताकि उनकी जान बचाई जा सके।

हालांकि, इस मांग पर अभी अदालत ने कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है। यह विषय आगामी सुनवाई में विचाराधीन रहेगा।

CJP ने किया देशव्यापी एक-दिवसीय उपवास का आह्वान

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने घोषणा की है कि 16 जुलाई को देशभर में समर्थक एक दिन का सामूहिक उपवास रखेंगे।

पार्टी का कहना है कि—

  • शिक्षा व्यवस्था में सुधार होना चाहिए।
  • परीक्षा अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच हो।
  • छात्रों के हितों की रक्षा की जाए।
  • आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा।

इन मांगों को लेकर पार्टी संसद मार्च सहित अन्य कार्यक्रमों की भी तैयारी कर रही है।

आंदोलन को मिल रहा राजनीतिक समर्थन

विभिन्न विपक्षी नेताओं ने वांगचुक के स्वास्थ्य पर चिंता जताई है और उनसे स्वास्थ्य का ध्यान रखने की अपील भी की है।

दूसरी ओर, केंद्र सरकार की ओर से इस पूरे आंदोलन पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है। अदालत में सरकार अपना पक्ष रखेगी।

कौन हैं सोनम वांगचुक?

सोनम वांगचुक लद्दाख के प्रसिद्ध इंजीनियर, शिक्षा सुधारक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं।

उनकी पहचान—

  • वैकल्पिक शिक्षा मॉडल
  • पर्यावरण संरक्षण
  • हिमालयी क्षेत्रों के विकास
  • आइस स्तूप (Ice Stupa) तकनीक
  • छात्रों के लिए नवाचार

जैसे कार्यों के कारण बनी है।

उनके कार्यों से प्रेरित होकर फिल्म “3 Idiots” के प्रमुख किरदार “फुंसुख वांगड़ू” का चरित्र विकसित किया गया था।

शिक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

हाल के वर्षों में कई राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।

इन घटनाओं ने लाखों छात्रों के बीच चिंता बढ़ाई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि—

  • परीक्षा सुरक्षा प्रणाली मजबूत करनी होगी।
  • डिजिटल निगरानी बढ़ानी होगी।
  • परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही तय करनी होगी।
  • पारदर्शिता बढ़ानी होगी।

हालांकि इन सुधारों को लागू करने का तरीका नीति निर्धारण का विषय है।

आगे क्या?

अब पूरे मामले पर सबकी नजर दिल्ली हाई कोर्ट की अगली सुनवाई पर रहेगी।

महत्वपूर्ण बिंदु—

  • सरकार अदालत में अपना जवाब देगी।
  • वांगचुक के स्वास्थ्य पर मेडिकल रिपोर्ट सामने आ सकती है।
  • CJP का राष्ट्रव्यापी उपवास आयोजित होगा।
  • संसद मार्च सहित आगे की रणनीति घोषित की जा सकती है।
  • आंदोलन की दिशा अदालत और सरकार की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी।

Sonam Wangchuk Hunger Strike अब केवल एक व्यक्ति का अनशन नहीं रह गया है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और छात्रों के भविष्य से जुड़े व्यापक विमर्श का हिस्सा बन चुका है।

फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। वहीं, वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। दूसरी ओर, CJP देशभर में समर्थन जुटाने के लिए एक-दिवसीय उपवास और अन्य कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई, सरकार का पक्ष और आंदोलन की अगली रणनीति इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेंगे।

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