भारत और Iran के विदेश मंत्रियों के बीच अहम चर्चा
भारत के External Affairs Minister S. Jaishankar ने मंगलवार को Iran के Foreign Minister Seyed Abbas Araghchi से फोन पर विस्तार से बातचीत की। यह बातचीत West Asia में जारी संघर्ष की स्थिति को लेकर हुई। दोनों नेताओं ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव और उसके संभावित प्रभावों पर चर्चा की।
यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब West Asia में हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं और कई देशों को इसकी वजह से राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
28 फरवरी के बाद तीसरी बातचीत
बताया जा रहा है कि 28 February को क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने के बाद से S. Jaishankar और Seyed Abbas Araghchi के बीच यह तीसरी टेलीफोनिक बातचीत है। इससे पहले भी दोनों नेताओं ने स्थिति की समीक्षा की थी और क्षेत्र में शांति बहाल करने के प्रयासों पर चर्चा की थी।
लगातार हो रही इन बातचीतों से यह संकेत मिलता है कि India और Iran दोनों ही देशों के लिए West Asia की स्थिरता काफी महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से कूटनीतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं, इसलिए क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर दोनों पक्ष सतर्क हैं।
शांति और स्थिरता पर भारत का जोर
बातचीत के दौरान S. Jaishankar ने साफ कहा कि India हमेशा West Asia में शांति और स्थिरता का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का संघर्ष क्षेत्र के देशों के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
भारत ने यह भी दोहराया कि समस्याओं का समाधान बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से ही होना चाहिए। भारत की नीति हमेशा से यह रही है कि अंतरराष्ट्रीय विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाए।
Indian diaspora की सुरक्षा पर विशेष ध्यान
इस बातचीत में Indian diaspora की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुख रूप से उठाया गया। West Asia के कई देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं और रहते हैं।
ऐसी स्थिति में क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष से उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ जाती है। S. Jaishankar ने कहा कि India अपने नागरिकों की सुरक्षा को सबसे ज्यादा प्राथमिकता देता है और जरूरत पड़ने पर हर संभव कदम उठाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और संबंधित देशों के साथ संपर्क में है।
Energy security भी बड़ा मुद्दा
India के लिए energy security भी एक महत्वपूर्ण विषय है। West Asia दुनिया के प्रमुख तेल और गैस उत्पादक क्षेत्रों में से एक है और भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है।
इस कारण क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ सकता है। बातचीत के दौरान इस विषय पर भी चर्चा हुई और दोनों पक्षों ने ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।
Iranian जहाजों को भारतीय बंदरगाहों पर अनुमति
इसी बीच कुछ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि India ने Iranian ships को अपने बंदरगाहों पर आने की अनुमति दी है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है और कई देशों के बीच समुद्री गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दोनों देशों के बीच व्यापार और सहयोग को बनाए रखने की दिशा में उठाया गया हो सकता है। हालांकि इस बारे में आधिकारिक स्तर पर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है।
कूटनीतिक संपर्क बनाए रखने पर जोर
विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे समय में देशों के बीच लगातार संवाद बहुत जरूरी होता है। India और Iran के विदेश मंत्रियों के बीच लगातार हो रही बातचीत इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इससे न केवल दोनों देशों के बीच सहयोग मजबूत होता है बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है।
आगे की स्थिति पर नजर
फिलहाल West Asia की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। कई देश क्षेत्र में शांति की अपील कर रहे हैं और कूटनीतिक समाधान खोजने की कोशिश कर रहे हैं।
India भी इस मामले में संतुलित और जिम्मेदार भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। सरकार का कहना है कि वह स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर उचित कदम उठाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में West Asia की स्थिति किस दिशा में जाती है, यह क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति के लिए काफी महत्वपूर्ण होगा। वहीं India की प्राथमिकता शांति, अपने नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखना बनी हुई है।







