ईरानी युद्धपोत डूबने पर सरकार की चुप्पी को लेकर विपक्ष का हमला

कांग्रेस ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब

Indian National Congress ने ईरानी युद्धपोत के डूबने की घटना को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। विपक्ष का आरोप है कि Narendra Modi के नेतृत्व वाली सरकार ने इस गंभीर अंतरराष्ट्रीय घटना पर अब तक स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस मुद्दे पर सरकार की चुप्पी भारत की रणनीतिक स्थिति और विदेश नीति पर सवाल खड़े करती है।

श्रीलंका तट के पास डूबा ईरानी युद्धपोत

रिपोर्टों के अनुसार, IRIS Dena नामक ईरानी युद्धपोत को United States Navy की एक पनडुब्बी ने हिंद महासागर में निशाना बनाया। यह घटना Indian Ocean में Sri Lanka के तट के पास हुई बताई जा रही है।

बताया गया है कि यह युद्धपोत हाल ही में भारत द्वारा आयोजित बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास MILAN Naval Exercise में भाग लेने के बाद लौट रहा था।

राहुल गांधी ने उठाए रणनीतिक स्वायत्तता पर सवाल

कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने इस घटना को लेकर प्रधानमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की चुप्पी से यह संकेत मिलता है कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता कमजोर हो रही है।

राहुल गांधी ने कहा कि इस तरह के महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भारत को स्पष्ट और मजबूत रुख अपनाना चाहिए।

खड़गे ने खाड़ी में भारतीयों की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता

कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने भी सरकार से कई सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि इस घटना में कथित तौर पर भारतीय नाविकों की मौत और खाड़ी क्षेत्र में रह रहे करीब एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा को लेकर सरकार की क्या योजना है।

खड़गे ने सरकार से मांग की कि यदि क्षेत्रीय तनाव बढ़ता है तो खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए स्पष्ट निकासी योजना (Evacuation Plan) तैयार की जाए।

ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी उठे सवाल

कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से पूछा कि यदि क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ता है तो भारत की तेल और गैस आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

सरकार से स्पष्ट नीति की मांग

विपक्ष ने केंद्र सरकार से इस पूरे मुद्दे पर स्पष्ट बयान और रणनीति पेश करने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय संकट के इस दौर में भारत को अपनी कूटनीतिक और रणनीतिक नीति स्पष्ट रूप से सामने रखनी चाहिए, ताकि देश के नागरिकों और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।