कपड़ा, समुद्री भोजन और जेम्स जैसे क्षेत्रों में बढ़ते एनपीए के जोखिम को देखते हुए आरबीआई से मानदंडों में ढील देने की अपील
नई दिल्ली/चेन्नई: अमेरिका द्वारा लगाए गए नए आयात शुल्कों से प्रभावित सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए राहत की उम्मीद जगी है। माकपा नेता और राज्यसभा सांसद सु. वेंकटेशन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर इन कारोबारियों के लिए तत्काल राहत पैकेज की मांग की है। उन्होंने विशेष रूप से कपड़ा, समुद्री भोजन (सीफूड) और जेम्स एंड ज्वैलरी क्षेत्रों में गंभीर संकट का हवाला देते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से एनपीए (Non-Performing Assets) मानदंडों में ढील देने का आग्रह किया है ।
एमएसएमई संकट के घेरे में
अपने पत्र में सु. वेंकटेशन ने कहा कि अमेरिका द्वारा लगाए गए अतिरिक्त आयात शुल्कों के कारण कई एमएसएमई गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। यह स्थिति बैंकों के बकाये का भुगतान न कर पाने के कारण एनपीए में बदल सकती है। उन्होंने बताया कि एमएसएमई क्षेत्र का भारत के कुल निर्यात में लगभग 45 प्रतिशत का योगदान है। विशेष रूप से कपड़ा, समुद्री भोजन, और जेम्स एंड ज्वैलरी क्षेत्र, जो अमेरिका को होने वाले कुल भारतीय निर्यात में लगभग 25 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखते हैं, इस टैरिफ युद्ध की चपेट में हैं। इन उद्योगों में एमएसएमई की 70 प्रतिशत से अधिक भागीदारी है ।
तमिलनाडु में गहराया संकट
सांसद ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि इस संकट का सबसे बुरा प्रभाव तमिलनाडु पर पड़ा है, जो कपड़ा निर्यात का एक प्रमुख केंद्र है। यहां अधिकतर इकाइयां एमएसएमई सेगमेंट में आती हैं। उन्होंने लिखा, “विदेशी ग्राहकों के निर्देश पर डिलीवरी स्थगित किए जाने से कारोबारियों के पास अचानक माल का स्टॉक जमा हो गया है। इस टैरिफ युद्ध की अनिश्चितताओं के कारण पिछले एक महीने से स्पिनिंग से लेकर गारमेंटिंग तक की पूरी सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। ऐसे में वैकल्पिक निर्यात बाजार ढूंढना बेहद मुश्किल काम है” ।
आरबीआई से विशेष अपील
इस विकट स्थिति को देखते हुए सु. वेंकटेशन ने वित्त मंत्री से हस्तक्षेप की प्रार्थना की है। उन्होंने आग्रह किया कि आरबीआई को निर्देश दिया जाए कि वह इस संकट काल के दौरान बैंकों को एमएसएमई के बकाया खातों को एनपीए घोषित न करने की छूट दे। उनका मानना है कि इससे इन उद्यमियों को राहत मिलेगी और वे अपने कारोबार को संभाल सकेंगे ।
सरकार का पक्ष और राहत के प्रयास
गौरतलब है कि हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौता हुआ है, जिसके तहत अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर लगने वाले पारस्परिक शुल्क को घटाकर 50 प्रतिशत से 18 प्रतिशत कर दिया है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इसे एमएसएमई और किसानों के लिए फायदेमंद बताया है . हालांकि, विपक्ष का मानना है कि अब तक हुए नुकसान और आपूर्ति श्रृंखला में आए व्यवधान को देखते हुए तत्काल राहत की आवश्यकता है।
विश्लेषकों का कहना है कि नए टैरिफ दरों के लागू होने से आने वाले समय में निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है, लेकिन पिछले कुछ महीनों में जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई के लिए बैंकिंग मानदंडों में ढील जैसे कदम उठाना जरूरी होगा। सु. वेंकटेशन का यह पत्र उसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।







