Israel Supreme Court Row: कोर्ट के फैसले को मानने से कैबिनेट का इनकार, बढ़ा संवैधानिक संकट

Israel Supreme Court Row

Israel Supreme Court Row को लेकर इजरायल में नया राजनीतिक और संवैधानिक विवाद खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार ने देश के Second Authority for Television and Radio (प्रसारण नियामक) से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नहीं मानने का निर्णय लिया है। कैबिनेट ने इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया, जिसके बाद विपक्ष, कानूनी विशेषज्ञों और राष्ट्रपति ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के शासन के लिए गंभीर चुनौती बताया है। रिपोर्टों के अनुसार, 7 अक्टूबर 2023 के हमलों के बाद यह पहली बार है जब नेतन्याहू सरकार ने किसी सुप्रीम कोर्ट के आदेश को खुले तौर पर अस्वीकार किया है।

क्या है पूरा मामला?

Israel Supreme Court Row की शुरुआत देश के प्रसारण नियामक Second Authority for Television and Radio को लेकर हुई। सरकार का तर्क है कि परिषद (Council) में आवश्यक न्यूनतम सदस्य नहीं बचे हैं, इसलिए उसे नियुक्तियां करने या अन्य निर्णय लेने का अधिकार नहीं है।

लेकिन 17 जून को इजरायल के सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि परिषद अपनी जिम्मेदारियां जारी रख सकती है। इसके बावजूद कैबिनेट ने फैसला किया कि वह परिषद द्वारा लिए गए निर्णयों को मान्यता नहीं देगी।

सरकार ने क्या कहा?

Israel Supreme Court Row पर संचार मंत्री शलोमो कारही और न्याय मंत्री यारिव लेविन ने कहा कि अदालत ने अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़कर फैसला दिया है।

सरकार का कहना है कि—

  • अदालत कानून के विपरीत नया अधिकार नहीं दे सकती।
  • संसद द्वारा बनाए गए कानून सर्वोच्च हैं।
  • सरकार उपलब्ध कानूनी उपायों के जरिए अदालत के फैसले को चुनौती देगी।

कैबिनेट ने कहा कि वर्तमान स्वरूप में नियामक परिषद के किसी भी निर्णय, नियुक्ति या मंजूरी को वह स्वीकार नहीं करेगी।

विपक्ष ने जताई कड़ी आपत्ति

Israel Supreme Court Row पर विपक्षी नेताओं ने सरकार के कदम की कड़ी आलोचना की है।

विपक्ष के नेता यायर लापिड ने इसे इजरायल के लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट सहित कई नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि अदालत के आदेशों का पालन नहीं किया गया तो इससे देश में संवैधानिक संकट गहरा सकता है।

राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया

Israel Supreme Court Row:

इजरायल के राष्ट्रपति आइजैक हर्ज़ोग ने भी इस घटनाक्रम पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करना कानून के शासन और राष्ट्रीय एकता के मूल सिद्धांतों को कमजोर करता है। उन्होंने सभी पक्षों से संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करने की अपील की।

क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?

Israel Supreme Court Row इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वर्ष 2023 में नेतन्याहू सरकार न्यायपालिका की शक्तियों में बदलाव (Judicial Reform) को लेकर बड़े विवाद में रही थी। उस समय पूरे देश में व्यापक प्रदर्शन हुए थे। बाद में 7 अक्टूबर 2023 के हमलों और युद्ध के कारण यह प्रक्रिया धीमी पड़ गई थी, लेकिन अब अदालत और सरकार के बीच टकराव फिर से तेज होता दिखाई दे रहा है।

आगे क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार और न्यायपालिका के बीच यह विवाद जारी रहता है तो—

  • संवैधानिक टकराव गहरा सकता है।
  • प्रशासनिक निर्णयों पर कानूनी विवाद बढ़ सकते हैं।
  • मीडिया नियामक से जुड़े फैसले प्रभावित हो सकते हैं।
  • राजनीतिक अस्थिरता और विरोध प्रदर्शन बढ़ने की संभावना है।

हालांकि सरकार का कहना है कि वह कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगी, जबकि विपक्ष अदालत के आदेशों का पालन करने की मांग कर रहा है।

Israel Supreme Court Row इजरायल की राजनीति और न्यायपालिका के बीच बढ़ते तनाव का नया अध्याय माना जा रहा है। कैबिनेट द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले को न मानने का निर्णय देश में संवैधानिक संकट की आशंकाओं को बढ़ा रहा है। आने वाले दिनों में अदालत, सरकार और विपक्ष के बीच होने वाले घटनाक्रम यह तय करेंगे कि यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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