ICICI बैंक के जरिए yuan में ईरानी तेल का भुगतान: भारतीय refiners को बड़ी राहत

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ICICI Bank Shanghai:

ईरानी तेल के लेनदेन के लिए भारत ने एक नया रास्ता अपनाया है। पहले कभी नकदी भुगतान नहीं हुआ था, लेकिन अब भारतीय रिफाइनर ईरानी तेल का भुगतान चीनी yuan में कर रहे हैं। यह भुगतान ICICI बैंक की शंघाई शाखा के माध्यम से किया जा रहा है। इस नई व्यवस्था से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंध और अमेरिकी रोकथाम को दरकिनार करने में मदद मिल रही है। इससे पहले भी भारत ने रुस के तेल के भुगतान के लिए yuan का इस्तेमाल किया था। इस पहल से घरेलू ऊर्जा आपूर्ति में राहत मिलने की उम्मीद है।

अमेरिकी अवकाश में ईरानी तेल की खरीद

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अप्रैल 2026 में अमेरिका ने रूस और ईरान से समुद्र में आ रहे तेल की खरीद पर 30 दिन की छूट (waiver) दी थी। इस अवकाश के दौरान भारत को ईरानी तेल खरीदने का अवसर मिला। अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने हाल ही में घोषणा की कि यह अवकाश और नहीं बढ़ाया जाएगा और ईरानी तेल की छूट इसी रविवार (19 अप्रैल) को समाप्त हो रही है। इस निर्णय से पहले भारत ने शीघ्रता से ईरानी तेल की खेप बुक करने की कोशिश की। व्यापारियों के अनुसार, 30 दिन के इस विशेष अवसर ने भारत सहित एशियाई रिफाइनरों को ईरान से तेल खरीदने का मौका दिया।

इस अवकाश का फायदा उठाते हुए इंडियन ऑयल (IOC) और रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ईरान से तेल खरीदने की तैयारी की। पम्पेट्रेडर बताते हैं कि अवकाश मिलने के बाद कई एशियाई क्रूड आयातक ईरान से तेल खरीदने के लिए समझौते कर रहे हैं। हालांकि, भुगतान की व्यवस्था एक बड़ी चुनौती थी, क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंध बैंकिंग लेनदेन को प्रभावित करते हैं। इन चुनौतियों के बावजूद भारत ने तत्काल कदम उठाए और तेल की खेपें आयात कीं।

IOC और रिलायंस का ईरानी तेल आयात

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अप्रैल में भारतीय तेल कंपनियों ने ईरान से तेल खरीद शुरू किया। IOC ने 2 मिलियन बैरल वाला ‘जया’ नामक भारी क्रूड वाहक खरीदा, जो सात साल में भारत की पहली ईरानी तेल खरीद थी। निजी रिफाइनर रिलायंस के लिए चार तेल जहाजों को मंजूरी दी गई, जिनमें से एक ‘Felicity’ जहाज ने अपना तेल उतार दिया है। इन खरीदों का मकसद घरेलू तेल आपूर्ति को बढ़ाना है, ताकि कमजोर पड़ती स्थानीय मांग को पूरा किया जा सके। इन सौदों के लिए आईसीआईसीआई बैंक की सहायता ली जा रही है। आईसीआईसीआई बैंक की शंघाई शाखा के माध्यम से तेल बेचने वालों के युआन खातों में भुगतान भेजा गया है।

IOC और रिलायंस ने इस खरीद में अमेरिकी अवकाश का पूरा फायदा उठाया। IOC और रिलायंस के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनियां घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पूरी कोशिश कर रही हैं और सरकार के नियमों का पालन कर रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि देश की बड़ी ऊर्जा कंपनियां अपने घरेलू जरूरतों के अनुरूप तेल लाने के लिए अधीरता से काम कर रही हैं। इन सौदों से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा मिला है।

भुगतान की प्रक्रिया और अद्वितीय व्यवस्था

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IOC और रिलायंस द्वारा खरीदे गए तेल का भुगतान असामान्य तरीके से किया गया। IOC ने तेल भरे जहाज के भारत में दाखिल होते ही (सप्लायर के “नोटिस ऑफ रीडिनेस” मिलने पर) कुल मूल्यों का लगभग 95% अग्रिम भुगतान कर दिया। दो स्रोतों के अनुसार, यह तरीके आम नहीं हैं। सामान्यतः पेरो-संस्थागत रिफाइनर तब भुगतान करते हैं जब तेल पूरी तरह से डिस्चार्ज हो जाता है। लेकिन इस बार भुगतान से जुड़ी शर्तें कड़ी थीं, इसलिए अनूठा कदम उठाया गया।

भुगतान ICICI बैंक के जरिए यूरोप या अमेरिका की जगह एक भिन्न मार्ग से हुआ है। ICICI बैंक की शंघाई शाखा ने चाइनीज़ युआन में ट्रांजेक्शन किया और तेल विक्रेता के युआन बैंक खातों में पैसा भेजा। दोनों कंपनियां (IOC और रिलायंस) सहित आईसीआईसीआई बैंक और पेट्रोलियम मंत्रालय ने टिप्पणी से इनकार किया है, लेकिन ट्रांजेक्शन का तरीका पहले नहीं बताया गया था। ICICI बैंक की इस प्रक्रिया ने भारतीय रिफाइनरों को भुगतान की सुविधा दी, जो अन्यथा अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण मुश्किल होती।

सरकार की प्रतिक्रिया

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इस नए भुगतान तरीका पर जब सरकार से पूछा गया तो पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि घरेलू मांग पूरी करना प्राथमिकता है और तेल कंपनियां “सरकार के नियमों के भीतर” कार्य कर रही हैं। उन्होंने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि उनके सामने देश की बड़ी ऊर्जा मांग को पूरा करना सबसे महत्वपूर्ण काम है, और इसीलिए कंपनियां ईरान से तेल आयात कर रही हैं। शेखर ने ये भी कहा कि पाबंदियों के बावजूद रिफाइनर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी कोशिश में लगे हैं।

सरकार के अन्य शीर्ष अधिकारियों ने खाड़ी क्षेत्र के साथ संपर्क बढ़ाया है ताकि ऊर्जा सप्लाई में रुकावट न हो। ऊर्जा मंत्री सहित कई मंत्रियों ने आस-पास की तेल-संपन्न देशों के साथ ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा की है। गृहमंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत देश में चल रहे संकट के बीच ऊर्जा आपूर्ति निरंतर बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठा रहा है। सुजाता शर्मा ने यह भी उल्लेख किया कि ईंधन संकट से उबरने के लिए घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाया जा रहा है और आवागमन को सुविधाजनक बनाया जा रहा है।

पृष्ठभूमि: प्रतिबंधों और पिछले अनुभव

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2019 में अमेरिका द्वारा ईरान पर लगे प्रतिबंधों के बाद भारत ने ईरान से तेल की खरीद पर रोक लगा दी थी। उस समय तक ईरान के सबसे बड़े ग्राहक चीन के छोटे रिफाइनर (जिन्हें स्थानीय भाषा में “टीपॉट” कहा जाता है) थे। भारत ने रूसी तेल पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद पिछले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर आयात किया, अक्सर रुपये या स्थानीय मुद्रा में भुगतान करके। कई सौदों में भारत ने रूसी तेल के लिए रुपये और UAE दिरहम का भी इस्तेमाल किया है। पाश्चात्य प्रतिबंधों के तहत इस पर पैसा भेजना मुश्किल था, इसलिए अब युआन जैसे विकल्पों का सहारा लिया जा रहा है।

हाल ही में रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान-इजरायल तनाव के बीच तेल की कीमतें बढ़ गई थीं। पेट्रोल-डीज़ल के दाम में वृद्धि से घरेलू उपभोक्ता को राहत देने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं, लेकिन ईंधन संकट के बीच अतिरिक्त तेल आयात की जरूरत भी बढ़ रही है। ईरानी तेल की यह खरीद इसी आपातकालीन स्थिति में सामने आई है, जहां सीमित समय के लिए मिले अवकाश का लाभ उठाया गया।

आगे की राह और प्रभाव

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इसी तरह के उपाय भविष्य में भी भारत की ऊर्जा नीति का हिस्सा हो सकते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर अमेरिकी छूट नहीं बढ़ती है तो ईरानी तेल पर खरीद सीमित होगी। हालाँकि, प्रारंभिक निरीक्षण से पता चला है कि भारत ने उपलब्ध अवसर को भुनाया है। अब सरकार को इस सौदे की औपचारिकता और भुगतान तंत्र को कानूनी दृष्टि से जांचना होगा। घरेलू तेल कंपनी अगली आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अन्य स्रोतों से भी आपूर्ति जुटाने की तैयारी करेगी।

इस नई व्यवस्था से भारत और चीन के वित्तीय रिश्तों को भी देखना दिलचस्प होगा। चीन ने पहले से ही ईरानी तेल में बढ़त बनाई हुई है, वहीं भारत ने रूसी तेल के लिए युआन में भुगतान शुरू किया है। इन कदमों से वैश्विक तेल भुगतान प्रणाली में बदलाव का आभास होता है। घरेलू स्तर पर, सरकार ने स्पष्ट किया है कि कंपनियां पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य कर रही हैं और किसी भी तरह के नियम-उल्लंघन की गुंजाइश नहीं है।

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भारतीय रिफाइनरों के लिए यह एक सकारात्मक और आवश्यक कदम है। इससे उन्हें तत्काल घरेलू मांग पूरी करने में मदद मिलेगी और अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच थोड़ी राहत मिलेगी। प्रमुख तथ्यों को संक्षेप में नीचे बिंदुवार बताया गया है:

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  • ICICI बैंक के जरिए युआन में भुगतान: भारत के रिफाइनरों ने अपना पहला ईरानी तेल खरीद पूरा किया और उसका भुगतान चीनी युआन में ICICI बैंक की शंघाई शाखा से किया गया।
  • IOC ने 7 साल बाद ईरानी तेल खरीदा: इंडियन ऑयल कारपोरेशन ने इस महीने 2 मिलियन बैरल ईरानी क्रूड खरीदा, जो सात साल में भारत का पहला ऐसा सौदा था।
  • रिलायंस को चार तेल जहाजों की मंजूरी: रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए चार ईरान से तेल लाने वाले जहाजों को मंजूरी दी गई, जिनमें से ‘Felicity’ ने अपना तेल उतार दिया है।
  • 30 दिन का अमेरिकी अवकाश: अमेरिका ने रूस और ईरान से समुद्र में आने वाले तेल पर 30 दिन के छूट के आदेश दिए थे, जो 19 अप्रैल को समाप्त हो गए। इस अवधि में भारत ने यह खरीद पूरी की।
  • सरकारी आदेशों का पालन: पेट्रोलियम मंत्रालय ने पुष्टि की है कि तेल कंपनियां घरेलू मांग को पूरा करने के लिए नियमों का पालन करते हुए तेल आयात कर रही हैं।

इन्हीं तथ्यों के साथ भारत ने अपने ऊर्जा संकट को आसान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अगले हफ़्तों में अमेरिकी पाबंदियों के नवीनीकरण पर फैसला होने पर यह साफ होगा कि इस व्यवस्था को और भी गहराई तक कैसे लागू किया जाएगा। वर्तमान में इस प्रक्रिया से रिफाइनरों को तत्काल लाभ मिल रहा है और घरेलू तेल आपूर्ति काफ़ी हद तक सुरक्षित हो गई है।

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