: राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से पहाड़ी राज्य की अर्थव्यवस्था पर संकट, केंद्र से मदद की गुहार
नई दिल्ली/शिमला: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की और राज्य के लिए विशेष वित्तीय पैकेज की मांग रखी। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद होने से पैदा हुए संकट से उबरने के लिए हिमाचल को विशेष केंद्रीय सहायता दी जाए ।
क्यों जरूरी है यह पैकेज?
मुख्यमंत्री सुक्खू ने वित्त मंत्री को बताया कि राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से हिमाचल प्रदेश की वित्तीय सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। उन्होंने साफ किया कि हिमाचल की तुलना उन राज्यों से नहीं की जा सकती जहां यह अनुदान बंद किया गया है। नागालैंड के बाद हिमाचल प्रदेश को सबसे ज्यादा 12.7 फीसदी राजस्व घाटा अनुदान मिलता था। बड़े राज्य शायद इस फैसले को झेल सकते हैं, लेकिन हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य की अर्थव्यवस्था इसे बर्दाश्त नहीं कर सकती ।
‘एक ही पैमाना’ नहीं चलेगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी राज्यों को एक ही पैमाने पर परखना न तो सही है और न ही पारदर्शी। उन्होंने इसे “सहकारी संघवाद की भावना को कमजोर करने वाला” बताया । सुक्खू ने संविधान के अनुच्छेद 275(1) का हवाला देते हुए कहा कि यह प्रावधान उन राज्यों को अनुदान देने के लिए है जो अपने राजस्व प्राप्तियों और खर्च के बीच के अंतर को नहीं भर पाते । उन्होंने यह भी कहा कि पहली बार ऐसा हुआ है जब वित्त आयोग ने छोटे पहाड़ी राज्यों की विकास जरूरतों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है ।
राज्य के अपने प्रयासों की जानकारी दी
मुख्यमंत्री ने वित्त मंत्री को बताया कि पिछले दो-तीन सालों में राज्य सरकार ने खर्च कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं। कोई ऑफ-बजट उधारी नहीं ली गई और विभिन्न उपायों से करीब 600 करोड़ रुपये सालाना जुटाए जा रहे हैं । उन्होंने यह भी बताया कि जीएसटी लागू होने से राज्य के राजस्व को भी नुकसान हुआ है। कर की दरें बढ़ाने और सब्सिडी को तर्कसंगत बनाने के बावजूद राजस्व घाटे के अंतर को नहीं भरा जा सका है ।
‘ग्रीन बोनस’ और उधारी सीमा बढ़ाने की भी मांग
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने 67 फीसदी वन क्षेत्र को बचाए रखने के लिए राज्य को मुआवजे के तौर पर सालाना 50,000 करोड़ रुपये के ‘ग्रीन बोनस’ देने की भी मांग रखी । साथ ही राज्य की उधारी सीमा को जीएसडीपी के 2 फीसदी बढ़ाने का अनुरोध किया गया ।
क्या बोलीं वित्त मंत्री?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुख्यमंत्री की बातों को ध्यान से सुना और राज्य की मांगों पर सहानुभूति से विचार करने का आश्वासन दिया । मुख्यमंत्री ने पहाड़ी राज्यों की अर्थव्यवस्थाओं के सही आकलन और सुधार के लिए एक समिति गठित करने का भी अनुरोध किया ।
गौरतलब है कि 16वें वित्त आयोग ने 2026-27 से राजस्व घाटा अनुदान बंद करने की सिफारिश की है, जिससे हिमाचल सहित 17 राज्य प्रभावित होंगे। हिमाचल में इस फैसले से करीब 10,000 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का अनुमान लगाया जा रहा है । राज्य का कर्ज पहले ही एक लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है । अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस पहाड़ी राज्य की मदद के लिए क्या कदम उठाती है।







