Uttar Pradesh में MGNREGS काम की मांग में गिरावट, पांच वर्षों में 31% कमी

ग्रामीण रोजगार योजना में कम हुई भागीदारी

Uttar Pradesh में ग्रामीण रोजगार योजना MGNREGS के तहत काम मांगने वाले परिवारों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में काफी कमी देखी गई है।

Rural Development Department के आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच वर्षों में योजना के तहत काम मांगने वाले परिवारों की संख्या में लगभग 31 percent की गिरावट आई है।

जानकारी के अनुसार 2021-22 में लगभग 77.6 lakh households ने इस योजना के तहत काम मांगा था, जबकि मौजूदा वित्तीय वर्ष में यह संख्या घटकर लगभग 53 lakh households रह गई है।

क्या है MGNREGS योजना

MGNREGS भारत सरकार की एक प्रमुख ग्रामीण रोजगार योजना है।

इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को साल में कम से कम 100 days का मजदूरी आधारित रोजगार उपलब्ध कराना है।

इस योजना के तहत गांवों में सड़क निर्माण, जल संरक्षण, तालाब खुदाई, वृक्षारोपण और अन्य विकास कार्य कराए जाते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और स्थानीय विकास को भी बढ़ावा मिलता है।

मांग में गिरावट के पीछे संभावित कारण

विशेषज्ञों का कहना है कि MGNREGS demand में कमी आने के पीछे कई कारण हो सकते हैं।

पहला कारण post-pandemic economic recovery बताया जा रहा है। महामारी के दौरान कई लोगों की नौकरियां चली गई थीं, इसलिए उस समय बड़ी संख्या में लोगों ने इस योजना के तहत काम मांगा था।

अब आर्थिक गतिविधियां फिर से सामान्य होने लगी हैं और कई लोगों को अन्य क्षेत्रों में रोजगार मिलने लगा है।

अन्य क्षेत्रों में बेहतर मजदूरी

दूसरा कारण यह बताया जा रहा है कि कई क्षेत्रों में मजदूरी दर पहले से बेहतर हो गई है।

निर्माण कार्य, कृषि, छोटे उद्योग और सेवा क्षेत्र में काम मिलने के कारण कुछ श्रमिकों ने MGNREGS की बजाय अन्य रोजगार विकल्पों को चुनना शुरू कर दिया है।

यदि किसी व्यक्ति को निजी क्षेत्र में अधिक मजदूरी मिलती है तो वह स्वाभाविक रूप से उसी काम को प्राथमिकता देता है।

भुगतान में देरी भी एक कारण

कुछ विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि MGNREGS के तहत मजदूरी भुगतान में देरी भी एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है।

कई बार योजना के तहत काम करने वाले श्रमिकों को भुगतान मिलने में समय लग जाता है।

यदि मजदूरी समय पर नहीं मिलती तो कई लोग अन्य काम की तलाश करने लगते हैं, जहां उन्हें तुरंत भुगतान मिल सके।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव

Uttar Pradesh में ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी धीरे-धीरे बदलाव देखा जा रहा है।

सड़क, बिजली, परिवहन और छोटे उद्योगों के विस्तार के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

इसके कारण कुछ श्रमिकों की निर्भरता MGNREGS जैसी योजनाओं पर पहले की तुलना में कम हो सकती है।

सरकार के लिए महत्वपूर्ण संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि योजना में मांग की कमी को कई तरीकों से देखा जा सकता है।

एक तरफ यह संकेत हो सकता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं और लोगों को अन्य रोजगार मिल रहे हैं।

दूसरी तरफ यह भी जरूरी है कि योजना के संचालन, मजदूरी दर और भुगतान प्रणाली की नियमित समीक्षा की जाए ताकि जरूरतमंद लोगों को रोजगार मिलता रहे।

योजना की भूमिका अभी भी महत्वपूर्ण

हालांकि मांग में कमी आई है, लेकिन MGNREGS अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा योजना मानी जाती है।

जब कृषि कार्य कम होता है या किसी क्षेत्र में रोजगार के अवसर घट जाते हैं, तब यह योजना लोगों के लिए सहारा बनती है।

इसलिए विशेषज्ञों का कहना है कि इस योजना को मजबूत बनाए रखना जरूरी है।

भविष्य की चुनौतियां

आने वाले समय में सरकार के सामने दोहरी चुनौती हो सकती है।

एक ओर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना जरूरी है।

दूसरी ओर यह भी सुनिश्चित करना होगा कि MGNREGS जैसी योजनाएं जरूरतमंद लोगों तक प्रभावी तरीके से पहुंचती रहें।

Uttar Pradesh में MGNREGS के तहत काम मांगने वाले परिवारों की संख्या में पिछले पांच वर्षों में 31 percent की कमी देखी गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे post-pandemic economic recovery, अन्य क्षेत्रों में बेहतर मजदूरी और योजना के भुगतान में देरी जैसे कारण हो सकते हैं।

हालांकि योजना अभी भी ग्रामीण रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है और भविष्य में इसकी भूमिका बनी रह सकती है।