Bengaluru Bellatrix Aerospace का क्रांतिकारी कदम
बेंगलुरु की Bellatrix Aerospace स्टार्टअप ने हाल ही में पानी पर चलने वाला नया प्लाज़्मा थ्रस्टर ‘Jal’ (जल) और हाइड्रैज़ीन मुक्त नया ग्रीन प्रोपल्शन सिस्टम ‘Rudra’ (रुद्र) विकसित किया है। इन दोनों प्रणालियों से सैटेलाइट संचालन पहले से कहीं ज्यादा स्वच्छ, सुरक्षित और प्रभावी हो सकेगा। कंपनी के अनुसार यह दुनिया का पहला ऐसा निजी क्षेत्र निर्मित प्लाज़्मा थ्रस्टर है जो पानी को प्रोपेलेंट की तरह इस्तेमाल करता है। Rudra थ्रस्टर हाइड्रैज़ीन-आधारित रासायनिक प्रणालियों की जगह लेता है और बिना विषाक्तता बढ़ाए उन्हीं प्रदर्शन को प्रदान करता है।
बातचीत में बैंसगढ़ी नेताओं ने बताया कि Bellatrix के इस प्रयोग से सैटेलाइट रॉकेट ईंधन में उपयोग होने वाले खतरनाक रसायनों की जगह साफ एवं स्थायी विकल्प मिलेंगे। इससे भविष्य में उपग्रहों की जीवन-शैली बढ़ेगी और रखरखाव आसान होगा। कंपनी ने अपने उत्पादों की स्थायीत्व और क्षमता सिद्ध करने के लिए अंतरिक्ष में भी परीक्षण शुरू कर दिए हैं। खास बात यह है कि Bellatrix Aerospace को भारत सरकार की ‘भारत इनोवेट्स 2026’ योजना के तहत वैश्विक मंच पर शॉकेस किए जाने के लिए चुना गया है, जिससे इन नवाचारों को अंतरराष्ट्रीय जगत में भी पहचान मिलेगी।
Jal थ्रस्टर: पानी से शक्ति
Bellatrix Aerospace:
परंपरागत रासायनिक प्रणोदन प्रणालियों की तुलना में Bellatrix का ‘Jal’ माइक्रोवेव प्लाज़्मा थ्रस्टर बहुत अलग है। इसका मुख्य ईंधन शुद्ध पानी है, जो जहरीले रसायनों की जगह बिना किसी जोखिम के काम करता है। कंपनी का दावा है कि “पानी-आधारित Jal थ्रस्टर पारंपरिक प्रणालियों की तुलना में 4 गुना अधिक Specific Impulse प्रदान करता है”। उदाहरण के लिए, इसका Jal 5000 मॉडल 5000 वॉट पावर पर 300 mN की थ्रस्ट पैदा करता है, जिसका Specific Impulse 1050 सेकंड है। यह थ्रस्टर 20000 घंटों से भी अधिक लगातार काम कर सकता है, और इसमें इस्तेमाल होने वाला पानी बचेगा (propellant cost शून्य)।
Jal थ्रस्टर का वजन बहुत कम होता है, यह जंग नहीं लगने वाला (corrosion-free) है, और इसकी विश्वसनीयता भी पारंपरिक इलेक्ट्रिक प्रणालियों से कई गुना अधिक है। Geo-stationary (GEO) उपग्रहों के लिए डिज़ाइन किए गए Jal थ्रस्टर बड़े मिशनों में ईंधन की बचत और लम्बी अवधि तक संचालन की सुविधा देंगे। Bellatrix के इंजीनियरों ने इसे विशेष रूप से भारी उपग्रहों और लंबी दूरी की कक्षाओं के लिए बनाया है, जिससे इन उपग्रहों का जीवनकाल और मिशन समय बढ़ाया जा सके।
Rudra ग्रीन प्रोपल्शन: हाइड्रैज़ीन से मुक्त
Bellatrix Aerospace:
Bellatrix का दूसरा मुख्य उत्पाद ‘Rudra’ ग्रीन थ्रस्टर है, जो पारंपरिक जहरीले हाइड्रैज़ीन प्रोपेलेंट का पर्याय है। “Rudra पारंपरिक हाइड्रैज़ीन प्रणालियों को सीधे प्रतिस्थापित करने वाला एक उच्च-प्रदर्शन वाला ग्रीन थ्रस्टर है”। इसका ईंधन HAN (Hydroxylammonium Nitrate) आधारित हाई-डेन्सिटी ग्रीन मिश्रण है, जिसमें विषाक्तता नहीं होती। Bellatrix के मुताबिक Rudra समान प्रदर्शन देते हुए हानिकारक दहन उत्पाद नहीं उत्पन्न करता।
नवीन तकनीक के कारण Rudra में मिशन की आयु बढ़ जाती है और Specific Impulse भी बहुत उच्च होती है। कंपनी का कहना है कि “Rudra सिस्टम पारंपरिक हाइड्रैज़ीन प्रणालियों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन, कम विषाक्तता, और लंबी मिशन अवधि प्रदान करता है”। Rudra थ्रस्टर के विभिन्न मॉडल (1 N, 5 N, 100 N) हैं, जिनकी ISP ~235-255 सेकंड के बीच है। जनवरी 2024 में इस थ्रस्टर को ISRO की PSLV C-58 रॉकेट पर अंतरिक्ष में भी भेजा गया था, जहां इसके सफल परीक्षण फायरिंग ने इसके काम करने की क्षमता साबित की।
Bellatrix ने अपने Rudra थ्रस्टर की अंतरिक्ष में तीन सफल टेस्ट फायरिंग पूरी कर ली हैं, जिससे इसकी विश्वसनीयता असली मिशन स्थितियों में सिद्ध हो गई है। कंपनी ISRO की वहम है जो इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन में उसके साथ साझेदारी कर रही है, जो इस टेक्नोलॉजी की बढ़ती साख का संकेत है। इस ग्रीन प्रोपेलेंट तकनीक से उपग्रह डिजाइनरों को हाइड्रैज़ीन की झंझट से मुक्ति मिलेगी और लॉन्च से पूर्व सेफ्टी परमिट लेना आसान होगा।
स्वच्छ ऊर्जा और अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी
Bellatrix Aerospace:
Hydrazine पर बढ़ रहे प्रतिबंधों के चलते उपग्रह प्रोपेलेंट के क्षेत्र में स्वच्छ विकल्पों की मांग तेज़ी से बढ़ी है। उदाहरण के लिए, यूरोपीय संघ ने उपग्रह प्रणोदन प्रणालियों में हाइड्रैज़ीन के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसी ज़रूरत को ध्यान में रखते हुए Bellatrix ने Jal और Rudra जैसी तकनीकें तैयार की हैं। पानी जैसे सामान्य और सुरक्षित स्रोत को इस्तेमाल करके ये प्रणालियाँ लॉन्च, हैंडलिंग, और उपयोग प्रक्रिया को बेहद सुरक्षित और किफायती बनाती हैं।
वातावरण की दृष्टि से भी लाभ है – जहरीले रसायनों के बजाय पानी और ग्रीन फ्लुइड्स से प्रोपेलेंट बनने पर सैटेलाइट मिशनों का प्रदूषण बहुत घट जाएगा। यह इनोवेशन न सिर्फ उपग्रहों को स्वच्छ रखेगा, बल्कि पृथ्वी के बाहरी कक्ष में बढ़ते स्पेस डिब्रिज संकट को कम करने में भी मददगार हो सकता है। भविष्य में जब हजारों उपग्रह एक साथ परिक्रमा करेंगे, तो उनका ईंधन भी स्थायी और गैर-विषाक्त होना चाहिए – इसी भावना को Bellatrix की टेक्नॉलॉजी आगे बढ़ा रही है।
भारत इनोवेट्स 2026 में वैश्विक मंच
Bellatrix Aerospace का यह तकनीकी रोमांच प्रधानमंत्री कार्यक्रम ‘भारत इनोवेट्स 2026’ के लिए चुनकर और भी महत्त्वपूर्ण हो गया है। भारत इनोवेट्स 2026 फ्रांस के Nice में 14–16 जून 2026 को आयोजित होने वाला एक बड़ा आयोजन है, जो ‘भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष’ के अंतर्गत भारत के उत्कृष्ट डीप-टेक स्टार्टअप्स को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और साझेदारों के सामने लाने के लिए बनाया गया है। शिक्षा मंत्रालय ने Bellatrix को भी इस मंच पर शामिल किया है, ताकि इसकी जल-आधारित और ग्रीन प्रणोदन तकनीक दुनिया के सामने प्रदर्शित की जा सके।
इस घटना में भाग लेने से Bellatrix को विदेशों में अपने उत्पादों के लिए ग्राहक और साझेदार ढूंढ़ने में मदद मिलेगी। सरकार की यह पहल दर्शाती है कि वह घरेलू नवाचारों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। इन परियोजनाओं के माध्यम से यह संदेश जाता है कि भारतीय अन्तरिक्ष उद्योग अब स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ प्रौद्योगिकियों की दिशा में तेज़ी से बढ़ रहा है।
आगे की राह
Bellatrix Aerospace की कहानी बेंगलुरु के IISc (भारतीय विज्ञान संस्थान) लैब से शुरू हुई थी, जहाँ Rohan Ganapathy और Yashas Karanam ने साथ मिलकर यह कंपनी 2015 में स्थापित की। पिछले दस वर्षों में, Bellatrix ने छोटे उपग्रहों के लिए प्रोपल्शन से लेकर बड़े GEO उपग्रहों तक के लिए प्रणालियाँ तैयार करके एक व्यापक पोर्टफोलियो बनाया है। हाल ही में इसने NewSpace India Limited (NSIL) के साथ साझेदारी भी की है ताकि उसका Pushpak Orbital Transfer Vehicle लॉन्च मिशनों में इस्तेमाल हो सके और सैटेलाइट को लक्षित कक्षा में पहुंचाने में आसानी हो।
अभी तक Bellatrix ने दुनिया भर के विभिन्न उपग्रह ऑपरेटरों से दिलचस्पी पाई है। भारत में Pixxel और GalaxEye जैसी कंपनियां इसके संभावित ग्राहक हैं, और विदेश में Planet Labs जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के साथ संभावित सौदे की चर्चा हो रही है। ISRO और DRDO सहित कई सरकारी निकाय भी इसकी सेवाएं इस्तेमाल कर रहे हैं। वित्तीय तौर पर भी Bellatrix सफल रही है – हाल ही में Series B फंडिंग में $20 मिलियन जुटाए गए हैं, जो इसकी विकास योजनाओं को गति देंगे।
इनोवेटिव तकनीक, सरकारी और निजी भागीदारी, और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर चुने जाने जैसी सफलताओं के साथ यह स्पष्ट है कि बेंगलुरु की Bellatrix Aerospace ने सेल्युलर स्पेस प्रोपल्शन के लिए एक नई दिशा तैयार कर दी है। आने वाले समय में जब उपग्रहों की संख्या आसमान छूने लगेगी, तब Bellatrix जैसे वैकल्पिक प्रणोदनों वाली कंपनियां पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी दक्षता दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
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