आंध्र प्रदेश लाएगा देश की पहली जनसंख्या प्रबंधन नीति, दूसरे और तीसरे बच्चे पर मिलेगा नकद प्रोत्साहन

रायसीना डायलॉग में बोले सीएम चंद्रबाबू नायडू- घटती प्रजनन दर चिंता का विषय, परिवार बढ़ाने वालों को सरकार देगी सहारा

नई दिल्ली/अमरावती: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने देश की पहली जनसंख्या प्रबंधन नीति पेश करने की घोषणा की है। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित रायसीना डायलॉग में बोलते हुए सीएम नायडू ने कहा कि दक्षिण भारत में तेजी से गिरती जन्म दर चिंता का विषय बन गई है। उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश की कुल प्रजनन दर (TFR) घटकर 1.5 रह गई है, जबकि जनसंख्या संतुलन बनाए रखने के लिए यह 2.1 होनी चाहिए ।

क्यों जरूरी है यह नीति?

सीएम नायडू ने रायसीना डायलॉग में कहा कि कुछ देश पहले से ही बुजुर्ग होती आबादी की समस्या से जूझ रहे हैं। भारत के पास अभी डेमोग्राफिक डिविडेंड (युवा आबादी का फायदा) का मौका है, जो 2047 तक रहेगा। लेकिन दक्षिण भारत में प्रजनन दर 1.5 के आसपास है, जो रिप्लेसमेंट लेवल से काफी नीचे है। उन्होंने कहा, “कल तक हम जनसंख्या नियंत्रण की बात कर रहे थे, आज हम जनसंख्या बढ़ाने की बात कर रहे हैं। दक्षिण भारत में यह एक बड़ी समस्या बन गई है” ।

क्या मिलेगा प्रोत्साहन?

मुख्यमंत्री ने विधानसभा में भी इस नीति का ड्राफ्ट पेश किया था। इसके तहत सरकार ने कई बड़े ऐलान किए हैं :

  • दूसरा या तीसरा बच्चा पैदा होने पर माता-पिता को डिलीवरी के समय 25,000 रुपये नकद दिए जाएंगे ।
  • तीसरे बच्चे के लिए पांच साल तक हर महीने 1,000 रुपये पोषण सहायता दी जाएगी ।
  • तीसरे बच्चे को 18 साल तक की मुफ्त शिक्षा सरकारी या रेजिडेंशियल स्कूलों में दी जाएगी ।
  • माताओं को एक साल की मातृत्व छुट्टी मिलेगी, वहीं पिताओं को दूसरे बच्चे पर एक महीने और तीसरे बच्चे पर दो महीने का पितृत्व अवकाश दिया जाएगा ।

क्या है पांच-स्तंभ मॉडल?

इस नीति को पांच स्तंभों पर आधारित किया गया है – मातृत्व (Matrutva), शक्ति (Shakti), नैपुण्यम् (Naipunyam), क्षेम (Kshema) और संजीवनी (Sanjeevani)। इसके तहत गर्भावस्था से लेकर बुढ़ापे तक हर नागरिक को सरकारी सहायता देने की योजना है ।

सरकार निःसंतान दंपतियों के लिए पीपीपी मोड पर आईवीएफ सुविधाएं उपलब्ध कराएगी और सिजेरियन ऑपरेशन को कम करने के प्रयास करेगी । साथ ही किशोरियों में गर्भधारण की मौजूदा 8.8 प्रतिशत दर को घटाकर 3 प्रतिशत से नीचे लाने का लक्ष्य रखा गया है ।

महिला कार्यबल पर फोकस

सीएम नायडू ने कहा कि फिलहाल राज्य में महिला श्रम बल भागीदारी 31 प्रतिशत है। अगर इसे बढ़ाकर 59 प्रतिशत किया जाए, तो राज्य की जीएसडीपी में 15 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है । इसके लिए वर्किंग वीमेन हॉस्टल, चाइल्डकेयर सेंटर और पिंक टॉयलेट जैसी सुविधाओं पर जोर दिया जाएगा ।

कब से होगा लागू?

यह नीति ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है और एक महीने तक लोगों से सुझाव मांगे जाएंगे। मार्च के अंत तक इसे अंतिम रूप देकर 1 अप्रैल 2026 से लागू कर दिया जाएगा ।

सीएम नायडू ने कहा कि यह नीति देश के लिए एक ‘गेम चेंजर’ साबित होगी और जनसंख्या प्रबंधन के मामले में आंध्र प्रदेश पूरे देश के लिए मिसाल बनेगा ।