बचपन में मोटापे का बढ़ता संकट: भारत विश्व में दूसरे स्थान पर

विश्व मोटापा दिवस पर जारी रिपोर्ट ने दी गंभीर चेतावनी

World Obesity Day (4 मार्च) के अवसर पर जारी World Obesity Atlas 2026 ने भारत के लिए एक गंभीर चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों में बढ़ते मोटापे के मामले में भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है, जबकि पहले स्थान पर चीन है।

रिपोर्ट बताती है कि भारत में बच्चों और किशोरों में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जो आने वाले वर्षों में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

5 से 19 वर्ष आयु वर्ग के 4.1 करोड़ बच्चे प्रभावित

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 5 से 19 वर्ष आयु वर्ग के 4.1 करोड़ से अधिक बच्चे अधिक वजन या मोटापे की समस्या से प्रभावित हैं।

चिंताजनक बात यह है कि यह संख्या हर साल लगभग 5 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, जो आने वाले समय में स्थिति को और गंभीर बना सकती है।

जीवनशैली में बदलाव बना मुख्य कारण

विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में मोटापे के बढ़ते मामलों के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। इनमें प्रमुख हैं:

  • शारीरिक गतिविधियों में कमी और अधिक समय तक बैठे रहना
  • फास्ट फूड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का बढ़ता सेवन
  • डिजिटल उपकरणों के कारण कम सक्रिय जीवनशैली
  • असंतुलित और अनियमित आहार

इन कारकों के कारण बच्चों का वजन तेजी से बढ़ रहा है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ रहा है।

कुपोषण और मोटापे का दोहरा बोझ

भारत जैसे देशों में एक और बड़ी चुनौती कुपोषण और मोटापे का दोहरा बोझ है।

जहां एक ओर कई बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में बच्चे अस्वस्थ खानपान और जीवनशैली के कारण मोटापे का शिकार हो रहे हैं। यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए जटिल चुनौती पैदा कर रही है।

2040 तक युवाओं में बीमारियों का बढ़ सकता है खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो 2040 तक युवाओं में कई गंभीर बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ सकते हैं।

इनमें शामिल हो सकते हैं:

  • उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन)
  • लिवर से जुड़ी बीमारियां
  • टाइप-2 डायबिटीज
  • हृदय संबंधी समस्याएं

कम उम्र में इन बीमारियों का खतरा बढ़ने से देश की स्वास्थ्य प्रणाली पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों में मोटापे की समस्या को रोकने के लिए जागरूकता, संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा देना जरूरी है।

स्कूलों, परिवारों और समाज को मिलकर बच्चों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना होगा, ताकि भविष्य में इस बढ़ते स्वास्थ्य संकट को नियंत्रित किया जा सके।