US-Iran Conflict एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि 8 और 9 जुलाई को अमेरिकी सैन्य हमलों में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई है जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। इन हमलों में ईरान के कई रणनीतिक क्षेत्रों को निशाना बनाया गया। प्रभावित इलाकों में इरानशहर, बंदर अब्बास, चाबहार और बुशेहर सहित पांच प्रांत शामिल बताए गए हैं। मंत्रालय के अनुसार घायलों में से 47 लोग अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं।
लगातार दूसरे दिन हुई इन सैन्य कार्रवाइयों ने पूरे मध्य पूर्व में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। खाड़ी देशों में सतर्कता बढ़ाई गई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहा है।
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन करमनपूर के अनुसार अमेरिका ने 8 और 9 जुलाई को पांच प्रांतों में हवाई हमले किए। मंत्रालय ने कहा कि अब तक 14 लोगों की मौत और 78 लोग घायल हुए हैं। इनमें से 47 घायलों का इलाज अस्पतालों में जारी है, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है।
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि कुछ हमले महत्वपूर्ण परिवहन और सैन्य बुनियादी ढांचे के निकट हुए। वहीं अमेरिकी सेना का कहना है कि उसका अभियान ईरान की सैन्य क्षमताओं और समुद्री सुरक्षा के लिए खतरा माने जा रहे ठिकानों पर केंद्रित था।
किन क्षेत्रों को बनाया गया निशाना?
रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी हमलों का फोकस दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी ईरान के कई रणनीतिक स्थान रहे। इनमें शामिल हैं:
- इरानशहर
- बंदर अब्बास
- चाबहार
- बुशेहर
- अन्य सैन्य और लॉजिस्टिक क्षेत्र
इन इलाकों का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यहां नौसैनिक, परिवहन और ऊर्जा से जुड़े महत्वपूर्ण ढांचे मौजूद हैं। कुछ रिपोर्टों में रेलवे अवसंरचना और बंदरगाह क्षेत्रों को भी नुकसान पहुंचने की बात कही गई है।
अमेरिका का क्या कहना है?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार हालिया अभियान में ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य मिसाइल लॉन्च क्षमता, वायु रक्षा प्रणाली, ड्रोन नेटवर्क और समुद्री सुरक्षा के लिए खतरा माने जा रहे सैन्य ढांचे को कमजोर करना था।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार हाल के दो दिनों में लगभग 90 से अधिक सैन्य लक्ष्यों पर कार्रवाई की गई, जबकि कुछ रिपोर्टों में इससे अधिक लक्ष्यों का भी उल्लेख है। विभिन्न स्रोतों में लक्ष्यों की संख्या अलग-अलग बताई गई है।
ईरान का जवाब
ईरान ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है और दावा किया है कि उसने जवाबी कार्रवाई में खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों में स्थित रणनीतिक स्थलों की ओर मिसाइल और ड्रोन दागे। अमेरिकी और क्षेत्रीय अधिकारियों ने कई हमलों को इंटरसेप्ट किए जाने की जानकारी दी है, जबकि कुछ दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।
US-Iran Conflict कोई नई घटना नहीं है। दोनों देशों के बीच चार दशक से अधिक समय से राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य तनाव बना हुआ है। 1979 की ईरानी इस्लामी क्रांति के बाद अमेरिका और ईरान के संबंध लगातार खराब होते गए।
हाल के वर्षों में परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव, प्रतिबंध, ड्रोन हमले और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दों ने दोनों देशों के बीच अविश्वास को और गहरा किया। 2026 में स्थिति तब और गंभीर हो गई जब दोनों देशों ने एक-दूसरे पर सैन्य उकसावे और क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ाने के आरोप लगाए।
US-Iran Conflict एक बार फिर वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में आ गया है।
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार दो दिनों की अमेरिकी कार्रवाई में 14 लोगों की मौत और 78 लोग घायल हुए हैं। वहीं अमेरिका का कहना है कि उसने केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। दोनों पक्षों के दावों के बीच स्वतंत्र पुष्टि सीमित है, इसलिए स्थिति पर सतत निगरानी आवश्यक है।
यदि आने वाले दिनों में सैन्य कार्रवाई तेज होती है, तो इसका प्रभाव केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार, क्षेत्रीय सुरक्षा और भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
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