TRE-3 Teacher Recruitment को लेकर बिहार में नया विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को निर्देश जारी कर 2024 की TRE-3 Teacher Recruitment प्रक्रिया के तहत नियुक्त उन शिक्षकों की सेवा समाप्त करने की कार्रवाई करने को कहा है, जिन्होंने NIOS के 18 माह के D.El.Ed पाठ्यक्रम के आधार पर नियुक्ति प्राप्त की थी। इस आदेश के बाद प्रभावित अभ्यर्थियों में चिंता बढ़ गई है और पूरे राज्य में इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
TRE-3 Teacher Recruitment विवाद क्या है?
शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि TRE-3 Teacher Recruitment के विज्ञापन में पहले से यह प्रावधान था कि NIOS द्वारा संचालित 18 माह के D.El.Ed पाठ्यक्रम को नियुक्ति के लिए मान्य योग्यता नहीं माना जाएगा। विभाग ने इसी नियम का हवाला देते हुए ऐसे अभ्यर्थियों की नियुक्ति को अमान्य मानने और उनकी सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है।
आदेश में किस नियम का दिया गया हवाला?
शिक्षा विभाग के अनुसार यह कार्रवाई भर्ती प्रक्रिया के दौरान लागू पात्रता शर्तों के आधार पर की जा रही है। विभाग ने अपने पूर्व पत्र और TRE-3 भर्ती विज्ञापन की संबंधित शर्तों का उल्लेख करते हुए कहा है कि 18 माह का NIOS D.El.Ed पाठ्यक्रम इस भर्ती के लिए स्वीकार्य नहीं था। इसी आधार पर जिला शिक्षा पदाधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है।
प्रभावित शिक्षकों में बढ़ी चिंता
इस आदेश के बाद राज्य के विभिन्न जिलों में कार्यरत प्रभावित शिक्षकों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई है। कई अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने भर्ती प्रक्रिया के तहत चयन होने के बाद नियमानुसार योगदान दिया था। अब अचानक सेवा समाप्त करने के निर्देश आने से उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
NIOS D.El.Ed को लेकर पहले भी रहा है विवाद
TRE-3 Teacher Recruitment:
NIOS का 18 माह का D.El.Ed कार्यक्रम पहले भी कई राज्यों में कानूनी विवाद का विषय रहा है। विभिन्न अदालतों में इस पाठ्यक्रम की वैधता और इसके दायरे को लेकर सुनवाई होती रही है। सर्वोच्च न्यायालय ने पहले स्पष्ट किया था कि 18 माह का यह विशेष कार्यक्रम मुख्य रूप से उन शिक्षकों के लिए था जो पहले से सेवा में थे और उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक योग्यता पूरी करनी थी। इसे सभी नई नियुक्तियों के लिए स्वतः समान योग्यता नहीं माना जा सकता।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल शिक्षा विभाग के निर्देश के बाद जिला स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। हालांकि प्रभावित अभ्यर्थी कानूनी विकल्प अपनाने की तैयारी भी कर रहे हैं। यदि मामला अदालत पहुंचता है तो अंतिम स्थिति न्यायिक निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी। अभी तक बिहार सरकार की ओर से इस आदेश को वापस लेने या संशोधित करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
TRE-3 Teacher Recruitment से जुड़ा यह मामला बिहार की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में एक बड़ा विवाद बन गया है। शिक्षा विभाग के नए निर्देश से NIOS के 18 माह D.El.Ed पाठ्यक्रम के आधार पर नियुक्त शिक्षकों की नौकरी पर अनिश्चितता पैदा हो गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जिला स्तर पर कार्रवाई किस तरह आगे बढ़ती है और क्या इस मामले में न्यायालय से कोई नई राहत मिलती है।
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