Kharif Sowing Deficit इस समय देश की कृषि के लिए सबसे बड़ी चिंता बन गया है। कमजोर Monsoon और 40% से अधिक बारिश की कमी के कारण India में Kharif फसलों की बुवाई धीमी पड़ गई है। ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार 25 June तक कुल बुवाई 182.72 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 22.7% कम है। मौसम विशेषज्ञ इस स्थिति के पीछे El Niño के प्रभाव और बारिश में आई भारी कमी को प्रमुख कारण मान रहे हैं।
Kharif Sowing Deficit: किन फसलों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर?
Kharif Sowing Deficit का असर कई प्रमुख फसलों पर साफ दिखाई दे रहा है।
सबसे अधिक गिरावट Soybean की बुवाई में दर्ज की गई है। इसके अलावा Cotton, Rice, Pulses और Maize की बुवाई भी पिछले वर्ष की तुलना में कम हुई है। केवल Sugarcane के रकबे में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त नमी नहीं होने के कारण कई राज्यों के किसान अभी भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
Kharif Sowing Deficit: बारिश की कमी बनी सबसे बड़ी वजह
India Meteorological Department (IMD) के अनुसार इस वर्ष June में देशभर में औसतन लगभग 39.8% कम बारिश दर्ज की गई, जिससे यह पिछले कई दशकों के सबसे सूखे June महीनों में शामिल हो गया।
El Niño की सक्रिय स्थिति के कारण Monsoon की प्रगति धीमी रही। कई राज्यों में बारिश सामान्य से काफी कम हुई, जिससे खेतों में नमी की कमी बनी रही और किसान समय पर बुवाई शुरू नहीं कर सके।
Kharif Sowing Deficit: किसानों और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि July में भी पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो Kharif Sowing Deficit का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार इसके कारण—
- खाद्यान्न उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
- दाल और खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।
- ग्रामीण आय पर दबाव बढ़ सकता है।
- खाद्य महंगाई में तेजी आने की आशंका है।
हालांकि कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि July के पहले पखवाड़े में अच्छी बारिश होती है तो बुवाई की गति में तेजी आ सकती है और नुकसान काफी हद तक कम किया जा सकता है।
Kharif Sowing Deficit: सरकार और मौसम विभाग की नजर
केंद्र सरकार और कृषि मंत्रालय लगातार बुवाई की स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। मौसम विभाग ने कुछ राज्यों में आने वाले दिनों में अच्छी बारिश की संभावना जताई है।
कृषि विशेषज्ञ किसानों को स्थानीय कृषि विभाग की सलाह के अनुसार ही बुवाई करने और मौसम पूर्वानुमान पर नजर बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं। यदि Monsoon सामान्य गति पकड़ता है तो आने वाले सप्ताहों में Kharif बुवाई में सुधार संभव है।
Kharif Sowing Deficit ने इस बार देश की कृषि व्यवस्था के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। 182.72 लाख हेक्टेयर तक सीमित बुवाई और 22.7% की गिरावट यह संकेत देती है कि कमजोर Monsoon का असर खेतों तक पहुंच चुका है। अब पूरे कृषि क्षेत्र की नजर July की बारिश पर टिकी है। यदि समय पर पर्याप्त वर्षा होती है तो किसान बुवाई की भरपाई कर सकते हैं, लेकिन बारिश में और देरी खाद्यान्न उत्पादन और महंगाई दोनों के लिए चिंता बढ़ा सकती है।
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