फरवरी में शाकाहारी थाली के दाम स्थिर, मांसाहारी थाली हुई 3% सस्ती

क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रॉयलर की कीमतों में गिरावट से नॉनवेज सस्ता, टमाटर के दाम 32% उछले

नई दिल्ली: फरवरी के महीने में आम आदमी के खाने पर होने वाला खर्च मिला-जुला रहा। एक तरफ जहां घर की बनी शाकाहारी थाली के दाम पिछले साल के मुकाबले स्थिर रहे, वहीं मांसाहारी थाली 3 प्रतिशत तक सस्ती हो गई। यह जानकारी क्रिसिल इंटेलिजेंस की ताजा रिपोर्ट ‘रोटी राइस रेट’ से सामने आई है ।

ब्रॉयलर की कीमतों ने दी राहत

रिपोर्ट के मुताबिक, मांसाहारी थाली सस्ती होने की सबसे बड़ी वजह ब्रॉयलर मुर्गे के दामों में आई भारी गिरावट रही। एक साल पहले की तुलना में फरवरी में ब्रॉयलर के भाव करीब 7 प्रतिशत तक कम रहे। चूंकि नॉनवेज थाली की कुल लागत में ब्रॉयलर की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी होती है, इसलिए इसकी कीमत घटने से पूरी थाली सस्ती हो गई । प्याज, आलू और दालों के सस्ते होने से भी मांसाहारी थाली के दामों को गिरावट में मदद मिली ।

टमाटर ने शाकाहारी थाली को महंगा होने से बचाया

शाकाहारी थाली के दाम स्थिर रहने की वजह दिलचस्प है। जहां एक तरफ प्याज, आलू और दालों के दाम घटे, वहीं दूसरी तरफ टमाटर के भाव आसमान छू रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी में टमाटर पिछले साल की तुलना में 32 प्रतिशत तक महंगा हो गया । क्रिसिल के डायरेक्टर पुषाण शर्मा ने बताया कि टमाटर की कीमतें बढ़ने की मुख्य वजह देर से हुई रोपाई (ट्रांसप्लांटेशन) है, जिसका असर फसल की पैदावार पर पड़ा ।

आंकड़ों पर नजर डालें तो प्याज के दाम सालाना आधार पर 24 प्रतिशत गिरे। इसकी वजह देर से आई खरीफ फसल की अधिक आवक और कमजोर निर्यात मांग को बताया गया है । वहीं आलू के दाम भी 13 प्रतिशत सस्ते हुए, क्योंकि फसल की कटाई का समय (पीक हार्वेस्टिंग) चल रहा है और पिछले सीजन का स्टॉक भी कोल्ड स्टोरेज से बाजार में आ रहा है । दालों की कीमतों में भी करीब 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई ।

क्या है थाली की कीमत का गणित?

क्रिसिल यह रिपोर्ट देश के अलग-अलग हिस्सों (उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम) में मिलने वाली सामग्री की कीमतों के आधार पर तैयार करता है। इसमें अनाज, दालें, सब्जियां, मसाले, खाने का तेल और गैस सिलेंडर की कीमतों को शामिल किया जाता है। यह आम आदमी की जेब पर पड़ने वाले असर को दिखाता है ।

भविष्य में क्या उम्मीद?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले दिनों में सब्जियों के दाम नरम रह सकते हैं। पुषाण शर्मा के मुताबिक, “टमाटर के दाम अप्रैल के मध्य तक सालाना आधार पर ऊंचे बने रहेंगे और उसके बाद फिर से मजबूत हो सकते हैं। आलू के दाम मार्च-अप्रैल में कटाई के चलते कम रहेंगे, जबकि प्याज पर अगले दो-तीन महीने दबाव बना रहेगा, जब तक कि निर्यात में तेजी नहीं आती”