सरकार ने रखा गेहूं खरीद का बड़ा लक्ष्य, इस बार 303 लाख टन खरीद की तैयारी

2026-27 सीजन के लिए तय हुआ टारगेट, रिकॉर्ड 1200 लाख टन उत्पादन का अनुमान, किसानों को होगा फायदा

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने आने वाले गेहूं सीजन के लिए बड़ी खरीद का लक्ष्य तय किया है। सरकार ने 2026-27 रबी मार्केटिंग सीजन के लिए 303 लाख टन (30.3 मिलियन टन) गेहूं खरीदने का टारगेट रखा है । यह फैसला शुक्रवार को दिल्ली में हुई राज्यों के खाद्य सचिवों की बैठक में लिया गया।

कितना होगा उत्पादन?

इस बार किसानों के लिए अच्छी खबर यह है कि गेहूं उत्पादन के नए रिकॉर्ड बनने की उम्मीद है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल गेहूं का उत्पादन 1200 लाख टन (120 मिलियन टन) तक पहुंच सकता है । पिछले साल 2025-26 में रिकॉर्ड 1,179 लाख टन (117.9 मिलियन टन) गेहूं का उत्पादन हुआ था, जो अब इस साल और बढ़ जाएगा ।

इस बार रबी सीजन में गेहूं की बुआई भी रिकॉर्ड 334 लाख हेक्टेयर (33.4 मिलियन हेक्टेयर) में हुई है । मौसम भी फसल के लिए अनुकूल बना हुआ है, जिससे पैदावार और बढ़ने की उम्मीद है।

कब से शुरू होगी खरीद?

गेहूं की सरकारी खरीद अप्रैल से जून के बीच होती है । यानी अब कुछ ही दिनों में खरीद का काम शुरू हो जाएगा। सरकार ने इस बार 303 लाख टन खरीद का लक्ष्य रखा है, जो पिछले सालों के मुकाबले काफी अच्छा है।

कितना है गेहूं का भंडार?

खाद्य निगम (FCI) के पास फिलहाल गेहूं का अच्छा स्टॉक है। 1 अप्रैल 2026 तक केंद्रीय पूल में करीब 182 लाख टन (18.2 मिलियन टन) गेहूं होने का अनुमान है । जरूरत से करीब डेढ़ गुना ज्यादा स्टॉक होने के कारण देश में गेहूं की कमी नहीं होगी।

किसानों को क्या होगा फायदा?

सरकार ने इस बार गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) भी बढ़ाकर 2,585 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है । पिछले साल यह 2,425 रुपये था, यानी किसानों को 160 रुपये प्रति क्विंटल का फायदा होगा ।

सरकार का कहना है कि इस बार करीब 297 लाख टन गेहूं की खरीद होगी और किसानों को एमएसपी के जरिए करीब 84,263 करोड़ रुपये मिलेंगे ।

निर्यात पर से हटा बैन

सरकार ने फरवरी 2026 में गेहूं निर्यात पर लगा बैन भी हटा दिया है । 2022 में लगे इस बैन को हटाने का मतलब है कि अब भारतीय किसान और व्यापारी दुनिया के दूसरे देशों में भी गेहूं बेच सकते हैं। सरकार ने 25 लाख टन गेहूं और 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की मंजूरी दी है ।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बार गेहूं का इतना बड़ा उत्पादन और सरकारी खरीद का बड़ा लक्ष्य किसानों के लिए फायदेमंद रहेगा। बाजार में गेहूं की कीमतें गिरने से बच जाएंगी और किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिलेगा।

हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि भारतीय गेहूं की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार से थोड़ी ज्यादा है, लेकिन अप्रैल-मई तक जब नई फसल आएगी, तो कीमतें कम हो सकती हैं और निर्यात बढ़ सकता है ।

क्या है आगे की योजना?

सरकार का कहना है कि वह किसानों के हित में हर कदम उठा रही है। अप्रैल से शुरू होने वाली खरीद के दौरान किसानों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए पूरी तैयारी की जा रही है। कई राज्यों में खरीद केंद्र खोले जाएंगे और किसानों को ऑनलाइन भुगतान किया जाएगा।

गेहूं के साथ-साथ सरकार ने धान और मोटे अनाज की खरीद का भी टारगेट तय किया है। रबी सीजन 2025-26 के लिए 76 लाख टन धान और करीब 7.8 लाख टन मोटे अनाज की खरीद का अनुमान है ।